
- ग्वालियर का गजराराजा मेडिकल कॉलेज देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 36वें पायदान पर; इंदौर 40वें, भोपाल 46वें और जबलपुर 48वें स्थान पर
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर लगातार बजट का इंतजार कर रहे ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चिकित्सा शिक्षा और संस्थागत प्रदर्शन की आईआईआरएफ 2026 रैंकिंग में जीआरएमसी ने प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और रीवा स्थित बड़े शासकीय मेडिकल कॉलेजों को पीछे छोड़ दिया है। देश के शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सूची में जीआरएमसी को 36वीं रैंक मिली है। वहीं इंदौर का महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज 40वें, भोपाल का गांधी मेडिकल कॉलेज 46वें, जबलपुर का नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज 48वें और रीवा का श्याम शाह मेडिकल कॉलेज 82वें स्थान पर रहा। प्रदेश के पांच प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जीआरएमसी का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा।
जीआरएमसी की इस उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश के अन्य बड़े मेडिकल कॉलेजों की तुलना में यहां इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और जीर्णोद्धार को लेकर लंबे समय से बजट का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर, भोपाल, इंदौर और रीवा जैसे संस्थानों में आधुनिक सुविधाओं, उपकरणों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए शासन स्तर से बड़े बजट उपलब्ध कराए जाते रहे हैं। इसके बावजूद जीआरएमसी ने राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन किया। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार चिकित्सकों, प्राध्यापकों, मेडिकल छात्रों और अन्य कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का यह परिणाम है। शिक्षण, चिकित्सा सेवाओं, शोध गतिविधियों और संस्थान की अकादमिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने रैंकिंग में संस्थान की स्थिति मजबूत की है। रैंकिंग में जीआरएमसी ने इंदौर के मेडिकल कॉलेज को चार, भोपाल को दस और जबलपुर को 12 पायदान पीछे छोड़ा है। रीवा के मेडिकल कॉलेज से जीआरएमसी का अंतर और भी बड़ा रहा।
रैंकिंग से विकास की उम्मीद बढ़ी
राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि के बाद जीआरएमसी के लिए विकास के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। संस्थान को रिसर्च प्रोजेक्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ अकादमिक तथा शोध सहयोग के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसका लाभ मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल अंचल के मरीजों को भी मिलने की उम्मीद है।
जीर्णोद्धार और उन्नयन के बजट का इंतजार
जीआरएमसी की उपलब्धि के बीच संस्थान के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। कॉलेज और अस्पताल परिसर के जीर्णोद्धार तथा उन्नयन के लिए बजट की आवश्यकता है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद संस्थान के चिकित्सक, शिक्षक और विद्यार्थी बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। अब उम्मीद है कि इस प्रदर्शन के आधार पर संस्थान को अधोसंरचना और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मरीजों और विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा
जीआरएमसी ग्वालियर-चंबल अंचल का प्रमुख चिकित्सा शिक्षण संस्थान होने के साथ बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार उपलब्ध कराता है। रैंकिंग में सुधार और संस्थान को मिलने वाली संभावित अतिरिक्त सुविधाओं का सीधा असर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। आधुनिक उपकरणों, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों को दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है। वहीं मेडिकल छात्रों को बेहतर क्लीनिकल एक्सपोजर और शोध के अवसर मिलेंगे।
पूरे जीआरएमसी परिवार के सामूहिक प्रयास का परिणाम
जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने कहा कि आईआईआरएफ रैंकिंग में मिला स्थान पूरे जीआरएमसी परिवार के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। संस्थान का लक्ष्य चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के जीर्णोद्धार और उन्नयन के लिए बजट का इंतजार किया जा रहा है। जीआरएमसी के लिए राष्ट्रीय रैंकिंग में 36वां स्थान हासिल करना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब चुनौती इस प्रदर्शन को आगे बनाए रखने की है। यदि संस्थान को अपेक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक उपकरण और शोध के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिलते हैं, तो राष्ट्रीय रैंकिंग में इसकी स्थिति और बेहतर होने की संभावना है।
