
बिच्छू डॉट कॉम। देश के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान नेटवर्क आईसीएआर के तौर-तरीकों पर केंद्र ने सबसे बड़ा चाबुक चलाया है। अब तक एसी कमरों में बैठकर सिर्फ भारी-भरकम फाइलें और किताबी रिसर्च पेपर चमकाकर प्रमोशन का फायदा उठाने वाले कृषि वैज्ञानिकों का खेल हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है। अब वैज्ञानिकों की तरक्की का रास्ता केवल भारी-भरकम डिग्रियों और पुराने रसूख से नहीं, बल्कि पद की व्यावहारिक जरूरतों और जमीनी काम से तय होगा। वैज्ञानिकों की कागजी जादूगरी पर पानी फेरते हुए इस नए सिस्टम को सीधे किसानों के हितों से जोडक़र जमीन पर उतार दिया गया है। यह बदलाव केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर हुआ है। केंद्रीय मंत्री का मानना है कि कृषि वैज्ञानिकों की रिसर्च तब तक बेकार है, जब तक उसका फायदा देश के आखिरी किसान के खेत तक न पहुंचे। यही वजह है कि लैब टू लैंड के इस नारे को हकीकत में बदलने के लिए यह ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। सबसे क्रांतिकारी बदलाव यह है कि व्यक्तिगत पुरस्कारों के नंबर काटकर अब उन कर्मठ वैज्ञानिकों को रिमोट एरिया बोनस यानी अतिरिक्त बोनस नंबर दिया जाएगा जो दूरस्थ, पिछड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जाकर सीधे किसानों के बीच काम करते हैं और उनकी फसलों को बचाने में मदद करते हैं।
