2000 से ज्यादा की यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज?

लोकसभा में गुरुवार को बिना किसी बहस के ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल’ या टोला पास कर दिया गया है। इस बिल का मकसद ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ में बदलाव करना है, जिससे यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू हो सकता है। इस एक्ट में बदलाव के अलावा, बिल में ‘फाइनेंस एक्ट 2026’ और ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ में भी बदलाव करने और विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने के लिए जून में जारी किए गए एक अध्यादेश को रद्द करने का प्रस्ताव है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इसके तीन मुख्य विषय हैं : विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’। बताया जाता है कि विदेशी कंपनियां अक्सर इस बात को लेकर अनिश्चित रहती हैं कि क्या भारत में या भारत के जरिए काम करने से उन पर कोई अप्रत्याशित टैक्स देनदारी तो नहीं बनेगी। बिल के विभिन्न प्रस्ताव स्पष्ट, स्थिर और अनुमान लगाने योग्य टैक्स सिस्टम के साथ-साथ मनचाही टैक्स व्यवस्था पाने की प्रोसेस भी देते हैं। ऐसा ही एक प्रस्ताव भारत से मैनेज होने वाले ‘एलिजिबल इन्वेस्टमेंट फंड’ (ईआईएफ) के लिए अपनी ग्लोबल इनकम पर टैक्स छूट पाने की शर्तों की संख्या को 13 से घटाकर 5 करना है। एमडीआर का मतलब है मर्चेंट डिस्काउंट रेट।

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