नई प्रमोशन नीति में फंसे 5 हजार पुलिसकर्मी

  • एसीआर के ‘क, ख, ग’ ग्रेड बने पदोन्नति में बाधा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश पुलिस में करीब दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया अब हजारों पुलिसकर्मियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। राज्य सरकार की नई पदोन्नति नीति-2025 के तहत एसीआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन) में निर्धारित अंकों की अनिवार्यता के कारण लगभग 5,000 आरक्षक, प्रधान आरक्षक, एएसआई, एसआई और इंस्पेक्टर नियमित पदोन्नति से वंचित हो गए हैं। पदोन्नति से बाहर हुए पुलिसकर्मी अब बड़ी संख्या में पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) पहुंचकर आवेदन और शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। अब तक करीब 5,000 आवेदन प्रशासन शाखा को प्राप्त हो चुके हैं।
राज्य पदोन्नति नियम-2025 के अनुसार, पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि के साथ-साथ पिछले पांच वर्षों की एसीआर के आधार पर कम से कम 12 अंक होना अनिवार्य है। एसीआर ग्रेड के अनुसार अंक इस प्रकार निर्धारित हैं-ग्रेड क+ उत्कृष्ट (4 अंक), ग्रेड क- अच्छा (3) अंक), ग्रेड ख- औसत से बेहतर (2) अंक), ग्रेड ग- औसत से कम (1 अंक) और  ग्रेड घ- अयोग्य (0 अंक)। जिन कर्मचारियों की पिछले पांच वर्षों की एसीआर में लगातार ‘ख’ ग्रेड दर्ज है, उनके केवल 10 अंक बन रहे हैं। इस कारण वे पदोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम 12 अंकों की पात्रता पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
पहले सेवा अवधि और रिकॉर्ड के आधार पर मिलती थी पदोन्नति
पुलिस विभाग में पहले लागू नियमों के तहत पदोन्नति के लिए कर्मचारी की सेवा अवधि, कार्य निष्पादन, पुरस्कार और दंड जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता था। केवल एसीआर ग्रेड के आधार पर पात्रता तय नहीं होती थी। इसी कारण कई ऐसे कर्मचारी, जिन्हें पहले कार्यवाहक (ऑफिसिएटिंग) पदोन्नति मिल चुकी है, अब नियमित पदोन्नति से बाहर हो गए हैं।
शिकायतों के समाधान के लिए विशेष सेल
पीएचक्यू ने बढ़ती शिकायतों को देखते हुए प्रशासन शाखा में विशेष सेल बनाया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रभावित कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अपनी एसीआर का पुनर्मूल्यांकन कराने के लिए संबंधित मूल्यांकन अधिकारी के समक्ष अपील करें। यदि समीक्षा के बाद उनके अंक 12 या उससे अधिक हो जाते हैं, तो वे पदोन्नति के पात्र हो सकते हैं।
आज से शुरू होगी रिव्यू डीपीसी
पुलिस मुख्यालय ने पदोन्नति सूची की समीक्षा के लिए सात अलग-अलग रिव्यू डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) गठित की हैं। इनमें क्लेरिकल स्टाफ, जिला पुलिस बल, एएसआई, सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर, सूबेदार, प्लाटून कमांडर और रक्षित निरीक्षक के मामलों की समीक्षा की जाएगी। पहले चरण में उन मामलों की जांच होगी, जिनमें तकनीकी त्रुटि या गलत जानकारी के कारण कोई कर्मचारी पदोन्नत हो गया या पात्र कर्मचारी सूची से बाहर रह गया। इसके बाद लगभग 15 दिन बाद दूसरी रिव्यू डीपीसी आयोजित होगी, जिसमें अपील के बाद संशोधित अंकों के आधार पर नए सिरे से पदोन्नति पर विचार किया जाएगा। आईजी (प्रशासन) हरिनारायण चारी मिश्र ने कहा कि बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनके निराकरण के लिए विशेष सेल बनाया गया है और रिव्यू डीपीसी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि सभी शिकायतों का नियमानुसार समाधान किया जा सके।

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