एनालॉग पनीर… मध्य प्रदेश में भी रोक पर विचार

  • सैंपल रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने की संभावना का परीक्षण किया जाएगा। राज्य का खाद्य सुरक्षा प्रशासन पहले दोनों राज्यों की ओर से जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों का अध्ययन करेगा। इसके साथ मध्य प्रदेश में अब तक लिए गए पनीर और संबंधित डेयरी उत्पादों के नमूनों की जांच रिपोर्ट भी परखी जाएगी। समीक्षा में यह देखा जाएगा कि प्रदेश में कितने नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, कितने असुरक्षित पाए गए और क्या बाजार में एनालॉग उत्पाद को असली दूध से बने पनीर के रूप में बेचकर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है। इसी आकलन के आधार पर राज्य सरकार आगे नियामकीय कार्रवाई पर निर्णय लेगी।
मध्य प्रदेश में अभी नहीं लगा है प्रतिबंध: मध्य प्रदेश में फिलहाल एनालॉग पनीर के उत्पादन या बिक्री पर कोई नया राज्यव्यापी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी नहीं हुआ है। मौजूदा कार्रवाई पड़ोसी राज्यों के आदेशों और प्रदेश की प्रयोगशाला रिपोर्टों की समीक्षा तक सीमित है। इसलिए इस चरण पर मध्य प्रदेश ने एनालॉग पनीर बैन कर दिया लिखना गलत होगा। सही स्थिति यह है कि सरकार रोक लगाने के औचित्य और कानूनी विकल्पों का परीक्षण करने जा रही है। छत्तीसगढ़ ने एक वर्ष के लिए ऐसे गैर-मानक डेयरी एनालॉग उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लगाई है, जो पनीर, क्रीम या बटर जैसे असली डेयरी उत्पादों की नकल करते हैं और ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं।
महाराष्ट्र में एक वर्ष का व्यापक प्रतिबंध
महाराष्ट्र ने 30 जुलाई से एनालॉग, नॉन-डेयरी और सिंथेटिक पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण तथा बिक्री पर एक वर्ष के लिए रोक लगाई है। होटल, रेस्तरां, कैटरर और क्लाउड किचन भी ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल या भंडारण नहीं कर सकते। महाराष्ट्र स्नष्ठ्र ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पनीर और डेयरी एनालॉग के 308 नमूने जांचे थे। इनमें 109 यानी लगभग 35.4 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 79 नमूने सब-स्टैंडर्ड और 30 असुरक्षित श्रेणी में बताए गए। जांच में कई मामलों में मिल्क फैट के स्थान पर वनस्पति वसा मिलने और होटल-रेस्तरां में इसकी जानकारी ग्राहकों को नहीं दिए जाने की बात सामने आई।
गुजरात ने भी लगाया प्रतिबंध
मध्य प्रदेश की समीक्षा के बीच गुजरात ने भी गैर-मानक एनालॉग पनीर, चीज और बटर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर राज्यव्यापी रोक की घोषणा कर दी है। गुजरात सरकार के अनुसार प्रयोगशाला जांच और निरीक्षण में गैर-मानक उत्पादों के मामले सामने आने के बाद उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। इस तरह अब मध्य प्रदेश से लगे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात तीनों राज्यों में अलग-अलग दायरे के प्रतिबंधात्मक कदम सामने आ चुके हैं। एफएसएसएआई की खाद्य श्रेणी में शामिल किया गया है। इसका अर्थ है कि ऐसी खाद्य श्रेणी नियामकीय व्यवस्था के भीतर मौजूद है, लेकिन यह उत्पाद को सामान्य दूध वाले पनीर के नाम पर बेचने की अनुमति नहीं देता। अप्रैल 2026 में एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्र ने स्पष्ट किया था कि किसी चीज एनालॉग को ‘पनीर’ बताकर बेचना गंभीर कानूनी उल्लंघन है।

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