- शहर में ऐतिहासिक हार, ग्रामीण क्षेत्र ने बचाई साख

गौरव चौहान
दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी आज प्रदेश स्तर पर व्यापक समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक में हार के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। बैठक में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, चुनाव अभियान प्रभारी सांसद भारत सिंह कुशवाह, सह प्रभारी राहुल कोठारी सहित चुनाव संचालन से जुड़े करीब 20 वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया है। बैठक में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा सहित वे सभी मंत्री भी शामिल होंगे, जिन्हें दतिया के छह मंडलों में चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा के बाद संगठनात्मक स्तर पर सख्त फैसले लिए जा सकते हैं।
दतिया उपचुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान का अलग-अलग रुझान रहा। भाजपा को दतिया शहर में 11,231 मतों से करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसे स्थानीय स्तर पर पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी चुनावी हार माना जा रहा है। इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा कांग्रेस से 5,215 वोट अधिक हासिल करने में सफल रही। यानी ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन मिलने के बावजूद शहर में भारी नुकसान ने भाजपा की जीत की संभावनाओं को समाप्त कर दिया। यही कारण है कि समीक्षा बैठक में शहरी मतदान पैटर्न सबसे बड़ा विषय रहेगा।
18 से अधिक पार्षदों पर कार्रवाई की तैयारी
पार्टी के भीतर यह धारणा बन रही है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक कमजोरी और अंदरूनी असंतोष ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया। सूत्रों के अनुसार दतिया नगर पालिका के 18 से 20 पार्षदों की भूमिका पार्टी विरोधी होने की प्रारंभिक जानकारी संगठन को मिली है। दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाहा सहित कई पदाधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। बैठक में कल्लू कुशवाहा हत्याकांड से जुड़े वायरल वीडियो और प्रदेशाध्यक्ष के नाम से जिलाध्यक्ष के निलंबन का कथित फर्जी आदेश वायरल करने के मामले की भी समीक्षा होगी।
नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर भी होगी चर्चा
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका भी समीक्षा बैठक का हिस्सा रहेगी। चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े नेताओं से इस संबंध में रिपोर्ट ली जाएगी। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि डॉ. मिश्रा के खिलाफ तत्काल किसी कार्रवाई की संभावना नहीं है। प्रदेश संगठन उनकी भूमिका पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को भेज सकता है, जिसके आधार पर आगे निर्णय होगा।
मुख्यमंत्री बोले—अगली बार और मजबूती से लड़ेंगे
दतिया उपचुनाव के परिणाम पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस की सीट कांग्रेस के पास ही रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 1,700 वोट अधिक मिले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपनी बात जनता के सामने रखी, कांग्रेस ने भी अपना पक्ष रखा और जनता ने जो निर्णय दिया है, पार्टी उसे विनम्रता से स्वीकार करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले चुनाव में भाजपा और अधिक मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी।
भाजपा में आत्ममंथन की आवाज
पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने दतिया के परिणाम को आत्ममंथन का अवसर बताया। वहीं नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उपचुनाव का महत्व भले सीमित माना जाता हो, लेकिन हार आखिर हार होती है और उससे सीख लेना जरूरी है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि पार्टी अनुशासन के मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा मतदाताओं के जनादेश को सम्मान पूर्वक स्वीकार करती है, लेकिन समीक्षा के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संगठन आगामी रणनीति तय करेगा। उन्होंने दोहराया कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और जो भी अनुशासनहीनता का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई निश्चित है।
कांग्रेस ने बताया बदलाव का संकेत
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दतिया की हार को भाजपा के अहंकार और जन भावनाओं की अनदेखी का परिणाम बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे जनता की जीत और भाजपा के अहंकार की हार बताया। उन्होंने कहा कि यह परिणाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एकजुटता और लंबे संघर्ष का फल है तथा 2028 के विधानसभा चुनाव में परिवर्तन का संकेत देता है। पटवारी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, सपा कार्यकर्ताओं और यादव समाज के सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया।
छह मंत्रियों को मिली थी मंडलों की जिम्मेदारी
भाजपा ने दतिया उपचुनाव में छह मंडलों की जिम्मेदारी छह मंत्रियों को सौंपी थी। दतिया शहर की राव उदय प्रताप सिंह को, दतिया ग्रामीण की दिलीप जायसवाल, उदगंवा की तुलसी सिलावट, सीतापुर की नरेंद्र शिवाजी पटेल, बड़ौनी की राकेश शुक्ला और बसई की धर्मेंद्र लोधी को जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें केवल दतिया ग्रामीण और बसई मंडल में भाजपा बढ़त बनाने में सफल रही, जबकि शहरी क्षेत्र में मिली भारी हार ने पूरे चुनाव का परिणाम बदल दिया। दतिया उपचुनाव की समीक्षा भाजपा के लिए केवल हार का विश्लेषण नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी का शुरुआती चरण भी मानी जा रही है। यदि समीक्षा में संगठनात्मक कमियां और स्थानीय स्तर पर असंतोष की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव और अनुशासनात्मक कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
