
- 17 साल बाद बीएड घोटाले में सीआईडी की बड़ी कार्रवाई
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के चर्चित बीएड प्रवेश घोटाला मामले में सीआईडी भोपाल ने 17 साल की जांच के बाद भोपाल कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। मामले में छिंदवाड़ा स्थित वैष्णवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के संचालक जीतेश गवनेकर और 15 छात्र आरोपित बनाए गए हैं। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने बाहरी राज्यों के अपात्र छात्रों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बीएड में प्रवेश दिलाया। सीआईडी जांच में सामने आया कि बीएड सत्र 2006-07 में डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के प्रवेश नियमों की अनदेखी कर राजस्थान, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों के छात्रों को प्रवेश दिया गया। आरोपियों पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और मार्कशीट का इस्तेमाल करने का आरोप है। नतीजों में गड़बड़ी की आशंका हुई, तो यूनिवर्सिटी ने छात्रों के परीक्षा परिणाम रोक दिए थे। वृत्तिवर्सिटी पर दबाव बनाने के लिए वैष्णवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के चेयरमैन जीतेश ने 2008 में जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका लगा दी। जांच में कई छात्रों के दस्तावेज सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए। कुछ सामान्य वर्ग के छात्रों ने भी कथित तौर पर फर्जी तरीके से आरक्षित वर्ग की सीटों पर प्रवेश लिया। कॉलेज प्रबंधन पर बाहरी छात्रों को निर्धारित सीमा से अधिक प्रवेश देने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश से शुरू हुई जांच
वर्ष 2008 में विश्वविद्यालय ने गड़बड़ी की आशंका के चलते छात्रों के परीक्षा परिणाम रोक दिए थे। इसके बाद कॉलेज संचालक ने जबलपुर हाईकोर्ट में ब्राचिका दायर की। मामले गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 26 नवंबर 2008 को जांच सीआईडी को सौंप दी थी। अगस्त 2009 में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब लंबी जांच के बाद चालान पेश किया गया है।
