
भारत के दवा नियामक ने जापानी कंपनी टाकेदा फार्मास्युटिकल्स की डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा को मंजूरी दे दी है। यह भारत में स्वीकृत होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है, जो डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करती है। अध्ययन के अनुसार, वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद डेंगू बुखार के मामलों में कमी और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम में गिरावट देखी गई है। यह तीन महीने के अंतराल पर दो डोज के रूप में दी जाती है। वैक्सीन को चार साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों, किशोरों और वयस्कों को दिया जा सकता है। इसके लिए पहले डेंगू का इतिहास होना या किसी ब्लड टेस्ट की जरूरत नहीं है। डब्ल्यूएचओ ने उच्च डेंगू प्रसार वाले क्षेत्रों में 6 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए इसकी सिफारिश की गई है। हालांकि, टीकाकरण के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। यदि दूसरी डोज में देरी होती है, तो कोर्स दोबारा शुरू करने की आवश्यकता नहीं है। उपलब्धता पर अगली खुराक ली जा सकती है। इंजेक्शन की जगह दर्द या लालपन, सिर दर्द, हल्का बुखार और मांसपेशियों में दर्द जैसे सामान्य व हल्के प्रभाव हो सकते हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। पिछले दो दशकों में भारत में डेंगू के मामलों में 11 गुना बढ़ोतरी हुई है। दुनिया में डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में है।
