दिल्ली से तय होंगे भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवार

भाजपा-कांग्रेस
  • दतिया उपचुनाव: उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति में जुटी पार्टियां

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां प्रत्याशी के चयन और चुनावी रणनीति पर मंथन कर रही है, वहीं कांग्रेस ने संभावित उम्मीदवारों के तीन नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। दोनों ही दलों में अंतिम फैसला दिल्ली से होने की संभावना है। दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। 13 जुलाई नामांकन की अंतिम तिथि है, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। ऐसे में दोनों प्रमुख दल उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर दतिया में आयोजित जिला कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद भाजपा के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में उपचुनाव की रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश संगठन पहले चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देगा, जिसके बाद प्रत्याशी के नाम सहित पूरी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। अंतिम निर्णय भाजपा संसदीय नेतृत्व करेगा। माना जा रहा है कि 7 या 8 जुलाई तक पार्टी उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार का चयन केंद्रीय नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली से नाम मांगे जाएंगे, तब प्रदेश संगठन अपनी अनुशंसा भेजेगा। किसे चुनाव लड़ाना है, इसका अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा।
ओबीसी और जातीय समीकरणों पर फोकस
कांग्रेस चुनावी रणनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अलग-अलग समाजों के नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। साथ ही सभी दावेदारों को एकजुट होकर अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में काम करने का संदेश दिया गया है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार अधिसूचना जारी होने के साथ ही 6 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रत्याशी 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। उधर प्रशासन ने भी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव प्रबंधन की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। दतिया उपचुनाव में दोनों दलों ने संगठनात्मक तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। भाजपा जहां रणनीति और उम्मीदवार दोनों पर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व से कराना चाहती है, वहीं कांग्रेस भी पैनल तैयार कर हाईकमान की स्वीकृति का इंतजार कर रही है। ऐसे में आने वाले दो-तीन दिनों में दोनों दलों के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ दतिया का चुनावी मुकाबला पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।
नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भले ही सार्वजनिक रूप से किसी नाम की घोषणा नहीं की है, लेकिन पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे पहले भी दतिया से चुनाव लड़ चुके हैं और क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। कुछ दिन पहले वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी संकेत दे चुके हैं कि भाजपा पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी और जीत दर्ज करेगी। हालांकि उन्होंने भी उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया था। भाजपा का कहना है कि पार्टी बूथ, मंडल और जिला स्तर पर नियमित संगठनात्मक बैठकों के कारण हर समय चुनाव के लिए तैयार रहती है। इसलिए उपचुनाव के लिए अलग से संगठन खड़ा करने की आवश्यकता नहीं है।
कांग्रेस ने तैयार किया तीन नामों का पैनल
दूसरी ओर कांग्रेस भी अपनी सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में दतिया में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से व्यापक रायशुमारी की। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने तीन संभावित नामों का पैनल तैयार किया है, जिसे जल्द केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के परिवार को प्राथमिकता दी जा रही है। शुरुआत में उनके पुत्र अनुज भारती का नाम सबसे आगे माना जा रहा था, लेकिन अब उनकी पत्नी शोभा भारती की दावेदारी मजबूत होती दिखाई दे रही है। कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच शोभा भारती के नाम पर अधिक सहमति बनने की चर्चा है। कांग्रेस की संभावित सूची में पूर्व पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष अवधेश नायक और भांडेर के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। दतिया में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान मंच से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती का संदेश पढकऱ सुनाया गया। इसे संगठन ने यह संकेत माना कि चुनाव में भारती परिवार की भूमिका अहम रहने वाली है और पार्टी उनके सहयोग के बिना चुनाव नहीं लडऩा चाहती।

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