अफसरों के दौरों पर ब्रेक, अब वर्चुअल होगी सरकार!

वर्चुअल
  • सरकारी फिजूलखर्ची पर बड़ा प्रहार, यात्रा, बैठक और प्रशिक्षण पर खर्च घटाने की कवायद

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकारी बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, निरीक्षण दौरों और अधिकारियों की यात्राओं पर होने वाले करोड़ों रुपए के खर्च को कम करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय में बैठे आईएएस, आईपीएस तथा सचिव स्तर के अधिकारी अपनी मर्जी से प्रदेश या देश के बाहर सरकारी यात्रा नहीं कर सकेंगे। इसके लिए मुख्य सचिव की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक खर्चों में कटौती, ऊर्जा संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत सरकारी यात्राओं से लेकर बिजली खपत तक पर निगरानी रखी जाएगी। वित्तीय और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्देशों का सख्ती से पालन हुआ तो सरकारी यात्राओं पर होने वाला खर्च घटेगा। बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का बजट कम होगा। ईंधन की खपत में कमी आएगी। बिजली बिल में बचत होगी। सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
    अब ‘टूर कल्चर’ पर लगेगा अंकुश
    सरकारी विभागों में अक्सर बैठक, समीक्षा, निरीक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नाम पर बड़े पैमाने पर यात्राएं होती हैं। इनमें यात्रा भत्ता, वाहन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी खर्च होता है। नई व्यवस्था के तहत आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारी प्रदेश या देश के बाहर जाने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेंगे। अन्य अधिकारियों को प्रदेश के बाहर यात्रा के लिए विभागीय सचिव की मंजूरी आवश्यक होगी। विदेश यात्राओं पर भी कड़ी निगरानी रहेगी और बिना अनुमति कोई दौरा नहीं हो सकेगा। विभागों को अनावश्यक दौरों से बचने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के दौर में कई काम बिना यात्रा किए भी किए जा सकते हैं।
    बैठकें अब स्क्रीन पर होंगी, सभागारों में नहीं
    नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा असर सरकारी बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर पडऩे वाला है। जीएडी ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि अधिकतम बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएं। प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संचालित किए जाएं। कार्यशाला और सेमिनारों के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से एक स्थान पर बुलाने से बचा जाए। जो काम डिजिटल माध्यम से संभव हैं, उनके लिए यात्रा स्वीकृत न की जाए। इस कदम से यात्रा और आयोजन संबंधी खर्च में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

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