
- पुराने मास्टर प्लान की वजह से असंतुलित विकास राजधानी का
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन (महानगरीय क्षेत्र) के रूप में विकसित करने की योजना है। यह योजना कब परवान चढ़ेगी? यह अभी भविष्य की गर्त में है। इस संदर्भ में विडंबना की बात यह है कि शहर की मूल विकास योजना (मास्टर प्लान)-2031 आज भी अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है। महानगरीय क्षेत्र के वर्ष 2047 तक के विकास की योजना भी लगभग तैयार है। जबकि इससे परे असलियत ये है कि अभी भी 21 साल पुरानी (2005) के मास्टर प्लान के जरिये आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। इसकी वजह से कई विसंगतियां सामने आ रही हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने वर्ष 2031 को ध्यान में रखते हुए भोपाल के लिए व्यापक विकास योजना तैयार की थी।
इसमें शहर का दायरा बढ़ाने, नए आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास, मेट्रो कॉरिडोर आधारित शहरीकरण, नई सडक़ों के निर्माण तथा बड़े तालाब, केरवा और कलियासोत क्षेत्र के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल थे। यह बात और है कि वर्षों बाद भी यह योजना लागू नहीं हो सकी। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि मास्टर प्लान लागू नहीं होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़ और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक अधोसंरचना तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं। कई परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षण और विकास प्रस्ताव तैयार करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
झीलों के संरक्षण पर भी सवाल
भोपाल की पहचान उसकी झीलों से है। विकास योजना-2031 में बड़े तालाब, केरवा और कलियासोत के कैचमेंट क्षेत्रों को संरक्षित रखने के लिए विशेष प्रावधान किए गए थे। हालांकि इस योजना लागू नहीं होने से इन क्षेत्रों में भूमि उपयोग और निर्माण गतिविधियों को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट विकास नीति के अभाव में पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
जब राजधानी का मौजूदा मास्टर प्लान 21 साल पुराना हो चुका है और नई विकास योजना अब तक लागू नहीं हुई, तो क्या भोपाल को पहले एक अद्यतन विकास रोडमैप की जरूरत है या फिर सीधे मेट्रोपॉलिटन रीजन की ओर बढऩां ही सही रणनीति होगी? यह सवाल अब राजधानी के भविष्य से जुड़ी सबसे बड़ी बहस बनता जा रहा है।
2005 के प्लान पर चल रही राजधानी
भोपाल में वर्तमान में वर्ष 2005 की विकास योजना प्रभावी है। जब यह योजना लागू हुई थी, तब शहर की आबादी करीब 14 लाख थी। पिछले दो दशकों में आबादी बढक़र लगभग 25 लाख तक पहुंच गई। हजारों नई कॉलोनियां विकसित हुई। वाहन संख्या कई गुना बढ़ी। नगर निगम सीमा का भी विस्तार हुआ। इसके बावजूद शहर का विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर ही आगे बढ़ रहा है।
