राजधानी में नहीं थम रहा… बिजली संकट

बिजली संकट
  • जगह-जगह पसरा अंधेरा, गुस्से में उपभोक्ता

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल में बिजली व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भीषण गर्मी और आंधी-बारिश के मौसम में शहरवासियों को लगातार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में शहर में कुल 14,974 बार बिजली आपूर्ति बाधित हुई। यानी पूरे महीने का औसत निकालें तो हर तीन मिनट में कहीं न कहीं बिजली गुल हुई। लगातार मेंटेनेंस और घंटों के शटडाउन के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। राजधानी की सडक़ों पर रात के समय निकलना अब सुरक्षित नहीं रह गया है। जगह-जगह पसरा अंधेरा आम लोगों के लिए डर और खतरे का कारण बनता जा रहा है।
एचटी लाइन का हवाला देकर टाल देते हैं जवाब
बिजली गुल होने पर उपभोक्ता जब स्थानीय अधिकारियों या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराते हैं तो अधिकांश मामलों में हाईटेंशन (11 केवी या 132 केवी) लाइन बंद होने का कारण बताया जाता है। अधिकारियों का कहना होता है कि एचटी लाइन चालू होते ही बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यह जवाब लगभग हर बार दिया जाता है, जबकि स्थायी समाधान दिखाई नहीं देता।
बिजली गुल से काम प्रभावित
बिजली कटौती का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों, छोटे उद्योगों और विद्यार्थियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में बार-बार बिजली जाने से पानी की सप्लाई, इंटरनेट सेवाएं और दैनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि मेंटेनेंस पर इतना समय और संसाधन खर्च किए जा रहे हैं तो बिजली आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक भरोसेमंद होनी चाहिए।
बार-बार कटौती से परेशानी
लगातार सामने आ रहे आंकड़े बताते हैं कि राजधानी की बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने नेटवर्क के आधुनिकीकरण, फॉल्ट प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और समयबद्ध सुधार कार्यों से ही बार-बार होने वाली बिजली कटौती पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। फिलहाल शहरवासियों को उम्मीद है कि आने वाले मानसून सीजन से पहले बिजली कंपनी व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
दो से सात घंटे तक कटौती
बिजली कंपनी वर्षभर लाइनों के रखरखाव और मरम्मत के नाम पर अलग-अलग क्षेत्रों में दो से सात घंटे तक का शटडाउन लेती रही है। इसके बावजूद मई में पांच मिनट से अधिक समय तक चलने वाले 6,896 बिजली कट दर्ज किए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नियमित मेंटेनेंस किया जा रहा है तो हल्की आंधी या बारिश में भी बिजली व्यवस्था क्यों चरमरा जाती है।
इन फीडरों पर सबसे ज्यादा संकट
बिजली कटौती के आंकड़ों में नबी बाग फीडर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां मई के दौरान 107 बार ट्रिपिंग हुई। इसके बाद मालीखेड़ी फीडर में 105 बार, विश्वकर्मा नगर में 97 बार, जबकि सीटीओ और आदमपुर फीडर में 95-95 बार बिजली बाधित हुई। दूसरी ओर शहर के 514 फीडरों में से 36 फीडर ऐसे रहे जहां पूरे महीने एक भी ट्रिपिंग दर्ज नहीं हुई। इनमें वल्लभ भवन, कलेक्टर कार्यालय और कुछ प्रीमियम आवासीय क्षेत्रों से जुड़े फीडर शामिल हैं।

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