
- धन-धान्य योजना की जिम्मेदारी सौंपी आईएएस को
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मप्र में प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है। लेकिन कृषि विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी इस राह में बाधा बन रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने धन-धान्य योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बड़े फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इस योजना के तहत मप्र के आठ कम उत्पादकता वाले जिलों अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, अलीराजपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ एवं डिंडोरी के लिए 13 आईएएस अधिकारियों को तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि मप्र सरकार वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। कृषक कल्याण वर्ष में सरकार किसानों के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों के ढंग से क्रियान्वयन पर फोकस कर रही है, लेकिन कृषि विभाग में अमले की कमी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधक बन रही है। विभाग में अमले की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य शासन ने विंध्याचल भवन स्थित कृषि संचालनालय में पदस्थ उप संचालक और सहायक संचालक संवर्ग के 13 अधिकारियों का एक साथ तबादला कर उन्हें केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के लिए चयनित जिलों में भेज दिया है। दरअसल, कृषि विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों की भारी कमी है। कृषि विभाग में करीब 14 हजार पद स्वीकृत हैं। अप्रैल, 2026 की स्थिति में स्वीकृत कुल पदों में से 7 हजार से अधिक पद रिक्त हैं। नई भर्ती नहीं होने और हर कर्मचारियों के रिटायर्ड होने से साल-दर-साल विभाग में कर्मचारियों की कमी होती जा रही है। करीब 10 साल से पदोन्नति पर रोक लगी होने से उच्च स्तर के पद प्रभारियों के भरोसे हैं। कृषि संचालनालय स्तर पर भी हालात इससे इतर नहीं हैं। प्रदेश में अपर संचालक के कुल 11 पदों में से 10 रिक्त हैं।
योजना को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी
दरअसल, केंद्र सरकार ने अक्टूबर, 2025 में प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय दलहन मिशन, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देना है। इस योजना में 8 जिले अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, अलीराजपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ एवं डिंडोरी को शामिल किया गया है। चूंकि कृषि विभाग में मैदानी अमले की भारी कमी है, इसलिए चयनित जिलों में धन-धान्य योजना के सुचारू संचालन के लिए भोपाल से अधिकारियों को भेजा गया है। इनका काम दूसरे अधिकारियों को सौंपा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संचालनालय में नए सहायक संचालकों की पदस्थापना शुरू हो गई है। उनके विधिवत काम संभालने के बाद कामकाज पटरी पर आ जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन अफसरों के तबादले से धन-धान्य योजना का काम तो पटरी पर आ जाएगा, लेकिन चूंकि ये अधिकारी सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों का जिम्मा संभाल रहे थे, इसलिए इनके अचानक किए गए तबादलों से संचालनालय का काम फिलहाल प्रभावित हो रहा है।
अफसरों के पास थी 60 से अधिक योजनाओं की जिम्मेदारी
जिन अधिकारियों का संचानलानय से तबादला हुआ है, उनमें 5 उप संचालक संवर्ग और 8 सहायक संचालक संवर्ग के अधिकारी शामिल हैं। ये अधिकारी कृषि संचालनालय में सीए हेल्पालाइन, सीएम सीएस मॉनिट, कमल सुविधा केंद्र, शिकायत, आरकेवीवाय शाखा, जय किसा फसल ऋण माफी योजना शाखा से संबंधित कार्य, पेंशन शाखा, लिटिगेशन, अन्नपूर्णा, सूरजधारा, कपास शाखा से संबंधित कार्य, पौध संरक्षण, लघु सिंचाई, पंचायत एवं ग्रामीण विकास के कार्य, नलकूप खनन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मिलेट मिशन योजना शाखा से संबंधित कार्य, बीज शाखा, स्थापना शाखा से संबंधित कार्य, आत्मा शाखा से संबंधित कार्य, प्राकृति खेती से संबंधित कार्य, प्रक्षेत्र शाखा, राज्यसभा व लोकसभा से संबंधित कार्य, जैविक खेती, पीकेवीवाय जैसी 60 से अधिक योजनाओं और कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जिन अफसरों का पदस्थ किया गया है उनमें संजय दोशी, उप संचालक को डिंडोरी, अवनीश चतुर्वेदी, उप संचालक को अनूपपुर, केएस यादव, उप संचालक को शहडोल, आरपीएस नायक, उप संचालक को डिंडोरी, हरीश मालवीय, उप संचालक को निवाडी, गोपाल पाटीदार, सहायक संचालक को शहडोल, श्याम चतुर्वेदी, सहायक संचालक को निवाडी, सतेंद्र सिंह रघुवंशी, सहायक संचालक को सीधी, बसंत माडरे, सहायक संचालक को अनुपपुर, रवि अमलियार, सहायक संचालक को टीकमगढ, रेहम डाबर, सहायक संचालक को अलीराजपुर, कृष्ण कुमार बडवाया, सहायक संचालक को डिंडोरी और कुलदीप शर्मा, सहायक संचालक को उमरिया शामिल हैं।
