
मध्यप्रदेश में जनजातीय वर्गीकरण में संभावित बदलाव की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। विशेष तौर पर विध्य के कोल समाज के दर्जे में पड़ा बदलाव कर उनके अधिकारों को और बढ़ाने की तैयारी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोल, कोरकू और मवासी जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति तथा कोतवाल समुदाय को (कोतवालिया) अनुसूचित जनजाति में शामिल करने व्यापक सर्वे और मानवशास्त्रीय अध्ययन करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में संबंधित जिलों कलेक्टरों को सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था ने जारी किए हैं। कोल जनजाति के लिए रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, नरसिंहपुर जिले में मानवशास्त्रीय अध्ययन किया जाएगा। कोरकू जनजाति के लिए खंडवा, बैतूल, हरदा में सर्वे होगा। मवासी जनजाति के लिए छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, नर्मदापुरम जिले में बेस लाइन सर्वे होगा। कोतवाल (कोतवालिया) समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, शाजापुर, रतलाम, राजगढ़, विदिशा जिले में सर्वे होगा।
