1 अप्रैल से देश में लागू होंगे नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम

मैनेजमेंट नियम
  • कचरा प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में लगी आग से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि 1 अप्रैल से लागू होने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू किए जाएंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस आदेश को दूरगामी असर वाला और ऐतिहासिक बताया है। यह प्रकरण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर एक याचिका से शुरू हुआ था। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडे ने मार्च 2023 में आदमपुर खंती में बार-बार आग लगने की घटनाओं को लेकर एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के बाद 31 जुलाई 2023 को एनजीटी ने भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की बैंच ने मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर कुछ हद तक संतोष जताते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर जैसे शहरों ने कचरा संग्रहण में सुधार किया है, लेकिन कचरा प्रोसेसिंग में अभी भी बड़ी बाधा है। जो नियम भोपाल पर लागू हैं, वे अब पूरे देश की नगर पालिकाओं और पंचायतों पर समान रूप से लागू होंगे। मामले में अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। जिसमें अधिकारियों को शपथ लेकर बताना होगा कि वे 1 अप्रैल से लागू हो रहे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट-2026 के लिए कितना तैयार हैं?
एनजीटी के आदेश को चुनौती देते हुए नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। 16 मई 2025 को इस मामले में सुनवाई हुई, जिसमें निगम ने जुर्माने की राशि माफ करने की मांग रखी। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण पर सुनवाई जारी है। हाल ही में हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव सहित छह वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया। 19 फरवरी को हुई ताजा सुनवाई में कोर्ट ने व्यापक टिप्पणी करते हुए कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 देश में कचरा प्रबंधन की समस्या की पहचान और उसके समाधान के लिए तैयार किए गए हैं और इनके उद्देश्यों को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। अदालत ने कहा कि ये निर्देश केवल भोपाल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे देश की स्थानीय निकायों पर लागू होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि 2016 के नियमों के पालन की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है और कई स्थानों पर उनका अधूरा या गलत तरीके से पालन हुआ है। नई व्यवस्था के तहत चुनौतियों से निपटने के लिए पुराने ढर्रे पर काम करना पर्याप्त नहीं होगा।
लापरवाही पर चलेगा क्रिमिनल केस
भोपाल। कचरा प्रबंधन पर होने वाली लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कचरा प्रबंधन के स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर दिए। इन नियमों या निर्देशों का भविष्य में पालन न करने पर शीर्ष कोर्ट ने भविष्य में क्रिमिनल केस तक चलाने की बात कही। इन नियमों के तहत पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने पर तीन स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले प्रथम स्तर पर नियमों का शुरुआती उल्लंघन करने पर तत्काल आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरे स्तर पर भी नियमों की अनदेखी पाए जाने पर पर्यावरण कानूनों के तहत क्रिमिनल केस (आपराधिक मामला) चलाया जाएगा, जबकि तीसरे स्तर पर भी उल्लंघन पाए जाने पर उन अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा चलेगा, जो अपनी निगरानी की ड्यूटी निभाने में विफल पाए जाते हैं। शीर्ष कोर्ट ने मामले में कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी तय कर दी है।
तय की गई जिम्मेदारी
 शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कचरा प्रबंधन को जन-आंदोलन बनाने के लिए महापौर, नगर निगम अध्यक्ष और वार्ड पार्षद की जिम्मेदारी तय की है। कोर्ट ने कहा कि जनता ने इन्हें लीड फैसिलिटेटर के रूप में चुना है। इनका कर्तव्य है कि अपने शहर और वार्ड के हर नागरिक को नए नियमों के प्रति जागरूक करें और नए नियमों को बारीकी से लागू करवाएं। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे जिला कलेक्टरों के माध्यम से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बुनियादी ढांचे का ऑडिट कराएं। नगरीय निकायों को अब अपनी कंप्लायंस रिपोर्ट के साथ फोटोग्राफिक सबूत भी ईमेल करने होंगे, ताकि कचरा हटाने की जमीनी सच्चाई को वेरिफाई किया जा सके।
देश में कचरे की बढ़ती मात्रा पर चिंता
अदालत ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में प्रतिदिन लगभग 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट उत्पन्न होता है। हालांकि भोपाल और इंदौर जैसे कुछ शहरों में कचरा संग्रहण की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिना प्रोसेस किया गया कचरा अक्सर असंगठित डंपसाइट या गैर-वैज्ञानिक लैंडफिल में पहुंच जाता है, जिससे भूजल और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा पीढ़ी और कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती। पुराने कचरे के अंबार, भूजल और हवा के प्रदूषण को देखते हुए 1 अप्रैल से लागू होने वाले आदेशों का सख्ती से पालन जरूरी है। अदालत ने स्थानीय निकायों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर जिम्मेदारी निभाने की बात कही और कहा कि कॉरपोरेटर, काउंसलर, मेयर तथा वार्ड सदस्य नियमों को समझकर उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करें।
आदमपुर डंपसाइट पर टेंडर को लेकर समय मिला
भोपाल से जुड़े मामले में अदालत ने यह भी कहा कि आदमपुर छावनी डंपसाइट पर जमा पुराने कचरे के निस्तारण के लिए कुछ औपचारिकताएं अभी बाकी हैं और टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए समय चाहिए। नगर निगम की ओर से दो सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। जानकारी के मुताबिक, भोपाल शहर से प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। इसमें से लगभग 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती तक पहुंचता है। कुल कचरे में करीब 290 टन मिट्टी जैसा अवशेष होता है, जबकि लगभग 510 टन मिश्रित कचरा रहता है। नगर निगम के पास मौजूद प्रोसेसिंग यूनिट की क्षमता 420 टन प्रतिदिन है, जिससे स्पष्ट है कि पूरी मात्रा का वैज्ञानिक निस्तारण अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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