बेरोजगार युवाओं को उठाना पड़ा लेटलतीफी का खामियाजा

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  • रिपोर्ट में खुलासा: लोक सेवा आयोग की लापरवाही से 30 दिन की भर्ती प्रक्रिया में औसतन 136 दिन तक लगे

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राज्य सरकार ने शुक्रवार को वर्ष 2025 की भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में अलग-अलग विभागों की आडिट में बड़े पैमाने पर अनियमितता पकड़ी है। लोक सेवा आयोग की ऑडिट में पाया कि जो परीक्षा 30 दिनों के भीतर होनी चाहिए थी, उसमें आयोग को 136 दिन लग गए। इससे बड़े पैमाने पर लेटलतीफी हुई। इसका खामियाजा बेरोजगार युवाओं को भुगतना पड़ा। कैग ने लोक सेवा आयोग के विभिन्न विभागों खासकर 2018-19 से लेकर 2022-23 की अवधि के लिए अभिलेखों की नमूना जांच की। इसमें पाया कि आयोग व राज्य सरकार के विभागों के बीच समन्वय की कमी पाई गई। क्योंकि विभागों की ओर से नियुक्तियों की सूचना देने में विलंब किया गया। इसके परिणाम स्वरुप भर्ती में देरी हुई। आयोग के ऑडिट में पाया कि 2018 से लेकर 2023 के दौरान 44 परीक्षाओं में से 28 परीक्षाओं में ही विज्ञप्ति जारी किया। यह योजना में कमी को दर्शाता है। आयोग ने 94 विज्ञापनों में से 30 विज्ञापन जारी करने में एक माह की उचित अवधि के अतिरिक्त औसतन 136 दिन लिए।
19 परीक्षाओं में से केवल पांच का आयोजन ऑनलाइन मोड पर किया
ऑडिट में कैग ने यह भी पाया कि 19 परीक्षाओं में से केवल पांच का आयोजन ऑनलाइन मोड पर किया गया। 2013 से अपनी नियमावली को अद्यतन नहीं किया। जिसके कारण शासन के निर्देशों को उसमें शामिल नहीं किया गया आयोग का वित्तीय प्रबंधन त्रुटिपूर्ण है। क्योंकि 42 फीसदी निधि का समर्पण किया गया। 2018 से 2023 के बीच में 51.18 करोड़ में से करीब 5 करोड रुपए का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया। इस दौरान 21 से 24 फीसदी के बीच मानव संसाधन की कमी थी। इसे संविदा कर्मचारियों से भरा गया था। आयोग ने 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी आवेदकों को परीक्षा शुल्क को वापस नहीं किया। इसके अलावा भी आयोग में कई बड़ी अनियमितताएं कैग ने पकड़ी है।
विज्ञापन प्रकाशित करने में 20 माह का समय ले लिया
आयोग ने विज्ञापन की तिथि से क्रमश: एक स्तरीय दो स्तरीय और त्रि स्तरीय परीक्षाओं के लिए 6, 12, 18 माह के निर्धारित समय की तुलना में 1 से 25 माह के विलंब के साथ चयन की प्रक्रिया पूर्ण की। एक मामले में यह भी पाया गया कि आयोग ने मांग प्राप्त करने के बाद भी विज्ञापन प्रकाशित करने में 20 माह का समय ले लिया। आयोग ने परिवहन विभाग के एक मामले में त्रुटि बस दो बार सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों के 13 पदों की मांग भेजी और आयोग ने अभ्यर्थियों का चयन किया, जो आंतरिक नियंत्रण के अभाव को दर्शाता है। जबकि आयोग या विभाग स्तर पर ऐसी गलतियों को रोका जा सकता था।

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