
- मध्य प्रदेश में 21 साल में 175% बढ़ीं अवैध कॉलोनियां
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में विकास योजना (मास्टर प्लान) न बनने से भोपाल, इंदौर सहित पांच बड़े शहरों का अनियोजित विकास होता रहा। भारत के नियंत्रक – महालेखापरीक्षक (कैग) ने संचालक नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय (टीएंडसीपी) की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई है। कैग ने संचालक टीएनसीवी और टीएंडसीपी के पांच जिलों (भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर अबलपुर उ उज्जैन) के कार्यालयों एवं इने जिलों की नगर निगमों के अप्रैल 2018 से मार्च 2023 तक की अवधि के अभिलेखों की जांच की। जांच में कैंग ने पाया कि संचालक टीएंडसीपी ने बीना पेट्रोकेमिकल्स एवं औद्योगिक प्रदेश के अलावा, प्रादेशिक योजनाएं तैयार नहीं की। प्रादेशिक योजना का प्रारूप मार्च 2012 में प्रकाशित किया गया था लेकिन अंतिम अधिसूचना दिसंबर 2024 तक लंबित थी। विकास योजनाओं की तैयारी के लिए संयुक्त संचालक, टीएंडसीपी उज्जैन, जबलपुर, इंदौर एवं ग्वालियर द्वारा हितधारकों से प्रासंगिक रिपोर्ट, इनपुट का संग्रह नहीं किया गया। इन पांच शहरों में मलीन बस्तियां भी बढ़ी। विकास योजना तैयार करते समय शासकीय विभागों, स्थानीय प्राधिकरणों एवं सार्वजनिक संस्थानों से प्रासंगिक प्रतिवेदन प्राप्त नहीं किए थे। मास्टर प्लान तैयार करते समय जिला योजना समिति के किसी भी पंचवर्षीय एवं वार्षिक विकास योजना के प्रारूप पर विचार नहीं किया।
नगर निगमों ने पर्यवेक्षण शुल्क पर जीएसटी एकत्र नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप 96.78 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर एवं उज्जैन नगर निगमों ने सर्वेक्षण में 1586 अनधिकृत कालोनियों की पहचान की, लेकिन अनधिकृत विकास, निर्माण को हटाने एवं पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की। टीएंडसीपी जिला कार्यालयों में मानव शक्ति की भारी कमी देखी। ये सभी दर्शाते हैं कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग काफी हद तक निष्क्रिय था। हालांकि सरकार ने इस बात को स्वीकारते हुए आश्वासन दिया है कि भविष्य में सभी प्रादेशिक योजनाओं को तैयार करने पर गंभीरता विचार करेगी।
