शहरों में पर्यटन से खुलेंगे समृद्धि के द्वार

पर्यटन
  • शासन ने सभी नगर निगमों से मांगे प्रस्ताव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र सरकार का फोकस शहरों में पर्यटन से समृद्धि के द्वार खोलने की है। इसके लिए प्रदेश के शहरों में नए पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे, साथ ही शहरों के भीतर पर्यटन स्थलों को निजी निवेश से विकसित कर आमदनी के स्रोत बढ़ाने पर है।  नगर निगमों की संपत्तियों में निजी निवेश की शुरुआत हाउसिंग प्रोजेक्ट, शॉपिंग मॉल, कमर्शियल प्रोजेक्ट, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, होटल-कम-पार्किंग-रेस्टोरेंट और पुरानी माइंस को पर्यटन के रूप में विकसित करने जैसे प्रोजेक्ट से होगी। शहर की सीमा में आ चुके पर्यटन स्थलों को भी इस मॉडल में शामिल किया जाएगा। शासन ने सभी निगमों से प्रस्ताव मांगे हैं।
जानकारी के अनुसार, अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड में इसके लिए एडवांस पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) सेल गठित कर दिया गया है। नगरीय विकास विभाग प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट में लाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि  वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण में नगरीय निकायों की आर्थिक मजबूती के लिए नए फाइनेंशियल मॉडल की घोषणा की। इसे पीपीपी का एडवांस वर्जन बताया जा रहा है, जो इनविट (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) और रीट (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) के रूप में लागू होगा। दिल्ली में यह मॉडल पहले से लागू है। इसे अब मप्र में बड़े स्तर पर लाया जा रहा है। इस मॉडल के बाद पर्यटन स्थलों का विकास वहां होगा, जहां फुट-फॉल (लोगों की आवाजाही) ज्यादा हो। यह व्यवस्था म्युनिसिपल बॉन्ड या सोशल इंपैक्ट बॉन्ड से आगे की मानी जा रही है। निगमों की खाली पड़ी जमीन भी इसमें उपयोग की जा सकेगी।
प्रोजेक्ट को सेबी में किया  जाएगा लिस्टेड
नगरीय विकास विभाग यह भी कोशिश करेगा कि नए फाइनेंशियल मॉडल का उपयोग करने से पहले प्रोजेक्ट को सेबी में लिस्ट किया जाए। सरकार ने जो मॉडल बनाया है वह कई पैमाने पर काम करता है। प्रोजेक्ट के सामने आने के बाद इससे मिलने वाले रेवेन्यू का आंकलन होगा। यदि यह सटीक बैठता है तो निकाय फिर संपत्ति की वैल्यू तय करेंगे और इसके शेयर या इक्विटी निजी निवेशक को देंगे। यानी संपत्ति को निजी निवेशकों के साथ साझा करके पैसा जुटाया जाएगा। फिर निकायों में मूलभूत जरूरतों पर फोकस होगा। वहीं वैल्यू कैप्चर फंड इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब सरकार किसी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे (मेट्रो या एक्सप्रेस-वे या फोर लेन या सिक्स लेन) का विकास करती है तो आसपास की जमीन या प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ जाती हैं। विकास से पहले और बाद में इस बढ़ी हुई कीमत का एक हिस्सा लोगों से लिया जाता है। इसे वन टाइम फिक्स चार्ज भी कहते हैं। इस चार्ज को उसी प्रोजेक्ट या अन्य विकास कार्यों में उपयोग किया जाता है। वहीं निकाय के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निजी निवेश का रास्ता इस मॉडल से खुलेगा। मसलन नए हाउसिंग प्रोजेक्ट और इंटीग्रेटेड टाउनशिप इसमें आएगी। हाल ही में सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप की नीति को मंजूरी दी है। इसमें बड़ा निवेश संभावित है। नगरीय निकाय बांड जारी करते हैं तो केंद्र सरकार प्रोत्साहन के रूप में कुछ पैसा देती है। से अधिक का बांड जारी करता है, तो उसे 100 करोड़ तक का प्रोत्साहन मिल सकेगा।

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