मप्र वन विभाग में अफसरों की कमी

मप्र वन विभाग
  • कई महत्वपूर्ण पद पड़े हैं खाली

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
सरकार प्रदेश में सुशासन और जनता को योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उधर विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन का जिम्मा निभाने वाले अफसर हीं नहीं है। अफसरों की कमी का सबसे गहरा सकट इनदिनों वन विभाग पर छाया हुआ है। वन विभाग के मुख्यालय वन भवन में शीर्ष अधिकारियों के कई पद खाली पड़े हैं। वहीं सभाग और जिलों में भी मुख्य वन संरक्षक और वन संरक्षकों की कमी बनी हुई है। इसके कारण मुख्यालय में अफसरों के दर्जन भर कक्षों में सन्नाटा पसरा हुआ है और कुछ अधिकारियों को दोहरा-तिहरा दायित्व संभालना पड़ रहा है। नतीजा वन विभाग से संचालित योजनाएं ही नहीं दैनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहे है।
दरअसल, प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में सरकार ने वन विभाग की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया है। इसके कारण आईएफएस कैडर मैनेजमेंट चरमरा गया है। 5 साल पहले पदोन्नति के चक्कर में अफसरों ने राज्य में वरिष्ठ स्तर पर पदों की संख्या में वृद्धि कराया था। हालांकि, प्रदेश सरकार इन पदों के अनुपात में केंद्र से आईएफएस कैडर के अफसरों का आवंटन नहीं करा सकी। इसके कारण अब पदों के विरुद्ध अधिकारियों की संख्या का गणित गड़बड़ा गया है। वहीं पदोन्नति में रुकावट की वजह से एपीसीसीएफ (अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक), सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) और सीएफ यानी वन संरक्षक के पद खाली पड़े हुए हैं। एक तो वन विभाग में अफसरों की कमी है। वहीं दूसरी तरफ कई अफसर प्रतिनियुक्ति पर हैं। पीसीसीएफ एचयू खान वन विकास निगम में, डॉ. समीता राजौरा लघु वनोपज संघ में और प्रदीप वासुदेवा राज्य वन अनुसंधान में प्रतिनियुक्ति पर है। जबकि एपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला वन विकास निगम भोपाल व प्रकाश उन्हाले अपर आवासीय आयुक्त के पद पर दिल्ली में सेवाएं दे रहे हैं। इनके अलावा भी कई सीसीएफ, सीएफ व डीएफओ प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं।
योजनाएं हो रही प्रभावित
जानकारी के अनुसार वन विभाग में स्थिति यह है कि  पद तो हैं लेकिन उन पर काम करने वालें कई अहम अफसरों की कमी है। ग्रीन इंडिया मिशन जैसी अहम शाखा इसलिए खाली है क्योंकि प्रधान मुख्य वन संरक्षक जैसे अधिकारी कम पड़ रहे हैं तो कार्य आयोजना एवं वन भूमि प्रबंधन व प्रशासन-1 जैसी अहम शाखा भी प्रभार पर है। यहां भी पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी पदस्थ किए जाते हैं। उधर मैदानी स्तर पर भी कई मुख्य वन संरक्षक , वन संरक्षक व सामान्य वन मंडलाधिकार कम पड़ रहे हैं। इसके कारण जनता व जंगल के काम प्रभावित हो रहे हैं। बता दें कि वन विभाग की वन्यप्राणी, कार्य आयोजना एवं वन भूमि प्रबंधन, प्रशासन-1, कैम्पा, उत्पादन, मानव संसाधन विकास, ग्रीन इंडिया मिशन, अनुसंधान एवं विस्तार और विकास जैसी 9 प्रमुख शाखाएं अहस होती है। इनका जिम्मा पीसीसीएफ को दिया जाता है लेकिन वर्तमान में 6 शाखाओं में ही पीसीसीएफ हैं।

Related Articles