
- तोड़ा स्टाप डैम, निकली जमीन
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। तालाबों के शहर भोपाल में भू-माफिया के निशाने पर हमेशा से इनके किनारे रहे हैं। इसी कड़ी में शाहपुरा तालाब हमेशा भू-माफिया के निशाने पर रहा है। तालाब के किराने अतिक्रमण करने के लिए तरफ-तरफ के कदम उठाए जाते हैं। वर्तमान में शाहपुरा तालाब के स्टाप डैम को तोडकऱ उसका पानी बहाया जा रहा है। ताकि पानी बहने से खाली हो रहे किनारों पर अतिक्रमण किया जा सके। तालाब के साथ हो रहा खिलवाड़ यहीं नहीं रुक रहा है, इसकी पटकथा बहुत पुरानी है। हाल ही में तालाब से गाद (कीचड़) तो निकाली गई, लेकिन उसे ठिकाने लगाने के बजाय किनारों पर ही लावारिस छोड़ दिया गया।
गौरतलब है कि राजधानी के तालाबों पर रसूखदारों की बुरी नजर लग चुकी है। वहीं दूसरी ओर सिस्टम की लापरवाही का गठजोड़ अब शाहपुरा तालाब को निगलने की तैयारी में है। यह कोई प्राकृतिक क्षरण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रहार है। बंसल अस्पताल के पास विद्युत कार्यालय के ठीक पीछे स्टाप डैम के दोनों कोनों को अज्ञात तत्वों ने तोड़ दिया है। इसका नतीजा यह रहा कि शाहपुरा तालाब का पानी लगातार बह रहा है और तालाब का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। यह तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी खतरा है। वहीं, तालाब का पानी कम होने के बाद चारों ओर जमीन दिखाई देने लगी है। इसके बाद अब नए अतिक्रमण करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
सुनियोजित साजिश की आशंका
जानकारों की मानें तो यह अतिक्रमण की एक पुरानी और आजमाई हुई पटकथा है। पहले पानी कम करो, फिर गाद डालकर जमीन को समतल बनाओ और धीरे-धीरे उसे कब्जे में ले लो। यदि डैम की मरम्मत कर पानी का स्तर वापस नहीं लाया गया, तो तालाब का दायरा सिमटने के साथ ही इसके किनारों पर अवैध निर्माण की फसल लहलहाने लगेगी। शाहपुरा क्षेत्र के रहवासियों ने भी अचानक पानी की स्तर कम होने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कोई सुनियोजित तरीके से पानी के स्तर को कम किया जा रहा है। इस मामले में भोपाल नगर निगम की कमिश्रर संस्कृति जैन कहती हैं कि शाहपुरा तालाब के स्टाप डैम को किसी ने तोड़ दिया है तो इसको दिखवाते हैं और स्टाप डैम को सही कराया जाएगा। तालाब पर किसी भी प्रकार अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।
जलीय जीवों पर मंडरा रहा खतरा
स्टाप डैम टूटने के कारण शाहपुरा तालाब का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। यह गिरावट केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि यहां पल रहे हजारों जलीय जीवों और मछलियों के लिए मौत की आहट है। शाहपुरा तालाब में बड़े पैमाने पर मछली पालन होता है। पानी कम होने से मछलियों के लिए आक्सीजन का संकट खड़ा हो गया है। यदि समय रहते इस बहाव को नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में यहां किनारों पर मरी हुई मछलियों का ढेर नजर आएगा।
