डील नहीं हुई तो होंगे गंभीर नतीजे: ट्रंप

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वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में होने वाली बातचीत को वे समर्थन देते हैं और खुद भी अप्रत्यक्ष रूप से इसमें जुड़े रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत सख्त बातचीत करने वाला देश है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह इस बार ज्यादा समझदारी दिखाएगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिका ने हाल में सैन्य कार्रवाई न की होती, तो ईरान एक महीने में परमाणु हथियार बना सकता था। यह बातचीत मुख्य रूप से इन मुद्दों पर हो रही है। इसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका के प्रतिबंध शामिल हैं। पहले भी कई बार बातचीत हुई, लेकिन या तो समझौते टूट गए या सिर्फ अस्थायी समाधान निकल पाया।

इस दौरान अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में महंगाई बहुत कम है। उन्होंन पेट्रोल की कीमत कई जगह 2 डॉलर प्रति गैलन से कम बताई। वहीं अपराध के मुद्दे पर उनका दावा है कि अमेरिका में हत्या के मामले 1900 के बाद सबसे कम हैं। जबकि सीमा सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि हजारों अवैध प्रवासियों को देश से वापस भेजा गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सरकारी फंडिंग विवाद के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार बताया। वहीं वोटर आईडी पर भी उन्होंने विपक्ष पर धोखाधड़ी चाहने का आरोप लगाया। ट्रंप ने इस दौरान क्यूबा से बातचीत जारी होने की बात कही। वहीं चीन के राष्ट्रपति से बातचीत के बाद ताइवान पर जल्द फैसला लेने की बात कही।

पहले ईरान में अमेरिका-समर्थित राजा (शाह) था। 1979 में इस्लामिक क्रांति हुई और नई सरकार बनी जो अमेरिका के खिलाफ थी। सबसे बड़ा टकराव तब हुआ जब ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 52 अमेरिकी लोगों को 444 दिन तक बंधक रखा। यहीं से दोनों देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए। 2000 के बाद अमेरिका को शक हुआ कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बना रहा है। हालांकि, ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली और शांति के कामों के लिए है। वहीं अमेरिका कहता है कि उसे डर है कि ईरान परमाणु बम बना सकता है। इस कड़ी में 2015 में अमेरिका – यूरोप और ईरान के बीच बड़ी डील हुई। इस डील के मुताबिक, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करेगा और अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध हटाएगा।

जब ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति बने, तब उन्होंने कहा यह खराब समझौता है। 2018 में अमेरिका डील से बाहर निकल गया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, दोनों देशों के रिश्ते फिर बहुत खराब हो गए। 2020 में अमेरिका ने ईरान के टॉप जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मार दिया। इसके बाद दोनों देशों में युद्ध जैसे हालात बन गए थे। अभी हालात ऐसे हैं, ईरान परमाणु कार्यक्रम तेजी से बढ़ा रहा है। अमेरिका डरता है कि ईरान परमाणु हथियार बना सकता है, कई बार बातचीत शुरू हुई लेकिन पूरी डील नहीं हो पाई। इसी वजह से अब जेनेवा में फिर से बातचीत हो रही है।

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