तीन मंत्रियों को बोलने नहीं देगी कांग्रेस

  • जहरीले कफ सीरप,भागीरथपुरा और कर्नल सोफिया मामला बनेगा मुख्य हथियार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं चुकेगी। इसका संकेत पार्टी ने सत्र के पहले ही दिन अपने आक्रामक रूख से दिखा दिया है। इस संदर्भ में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी रणनीति बन गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि यह सत्र आंकड़ों का खेल नहीं बनने दिया जाएगा, बल्कि किसानों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों से जुड़े सवालों पर सरकार से सीधे जवाब मांगे जाएंगे। इस पूरे सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस जहरीले कफ सीरप,भागीरथपुरा और कर्नल सोफिया मामले को अपना मुख्य हथियार बनाएगी।
कांग्रेस की रणनीति है कि विधानसभा में कांग्रेस उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जनजातीय कार्यमंत्री विजय शाह को न तो बोलने देगी और न ही कोई बात सुनेगी। जहरीले कफ सिरप से छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा के साथ इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से मौतों के लिए जिम्मेदार स्वास्थ्य और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री के साथ सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अशालीन टिप्पणी करने वाले जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के त्यागपत्र की मांग प्रदेश कांग्रेस ने की है। वहीं, अमेरिका से कृषि क्षेत्र को लेकर हुई ट्रेड डील के विरोध में 24 फरवरी को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
मंत्रियों के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने प्रशासनिक विफलताओं के मुद्दे पर कैलाश विजयवर्गीय, राजेन्द्र शुक्ल और विजय शाह से इस्तीफे की मांग उठाने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना सुशासन का दावा खोखला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि इंदौर में दूषित जल से 35 मौतें हो गईं और सरकार राज्यपाल से अभिभाषण में स्वच्छ जल की बात करा रही है। सरकार को दूषित जल आपूर्ति के लिए दोषी नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जहरीले कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों के लिए उप मुख्यमंत्री स्वास्थ्य राजेंद्र शुक्ल और सेना की अधिकारी के विरुद्ध अशालीन टिप्पणी करने वाले विजय शाह पर कार्रवाई करनी चाहिए। शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन की कार्रवाई पर निर्णय लेने के निर्देश दिए लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे मंत्रियों को सदन में न तो बोलने देंगे और न ही उनकी कोई बात सुनी जाएगी। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे तीनों मंत्रियों का त्यागपत्र लें। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड को लेकर पटवारी ने कहा कि किसानों को इसका सीधा नुकसान होगा। भारत सरकार तथ्यों को छुपा रही है। किसान हित के लिए पार्टी 24 फरवरी को विधानसभा का घेराव करेगी। इसके पहले प्रवक्ताओं का चयन करने के लिए टैलेंट हंट कार्यक्रम का पोस्टर लांच किया गया।
आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बजट का आकार बढ़ रहा है, लेकिन प्रदेश पर कर्ज का बोझ उससे भी ज्यादा है। कांग्रेस ने राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार उधार के पैसे से दुकान सजा रही है। कर्ज लेती जा रही है और बार-बार कह रही है कि हम पूंजीगत व्यय बढ़ा रहे हैं। जीएसडीपी की तीन प्रतिशत सीमा में ही कर्ज ले रहे हैं, पर बड़ा प्रश्न यह है कि आय के साधन कहां बढ़ रहे हैं। सरकार ब्याज पर ब्याज दे रही है। उसका फाइनेंसियल सिस्टम पूरी तरह से फेल है। अब तक सरकार ने बांड जारी करना प्रारंभ कर दिया है। सरकार कोई भी आए चुनौती रहेगी कि आर्थिक संकट से कैसे निपटें। कई एग्रीमेंट 30 से 40 वर्ष के लिए कर लिए हैं। बजट सत्र में इन सभी बातों को सरकार के संज्ञान में लाएंगे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विपक्ष हमेशा जनता के अधिकार और उससे जुड़े मुद्दे प्राथमिकता से रखने की कोशिश करता है। इस मामले में मैं बिल्कुल निगेटिव नहीं हूं। विधानसभा में जो बातें आनी चाहिए उन्हें सामने लाने की कोशिश करता हूं। कांग्रेस विधायक दल ने इंदौर-भागीरथपुरा में कथित जल प्रदूषण से हुई मौतों के मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया। इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने की बात कही गई है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चर्चा से बच रही है और जवाबदेही तय नहीं कर रही। बैठक में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनिवार्य सरकारी खरीद न होने और ‘भावांतर मॉडल’ को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई। कांग्रेस ने आशंका जताई कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का असर प्रदेश के किसानों पर पड़ सकता है। इस पर सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की जाएगी।
युवाओं की भर्तियां और बेरोजगारी
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि सदन में प्रदेश में हजारों पद रिक्त होने और सरकारी भर्तियों के लंबित रहने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। कांग्रेस ने कहा कि इससे युवाओं का भविष्य अधर में है। बैठक में बढ़ते भ्रष्टाचार और महिला अपराधों पर भी सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बनी। साथ ही ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू न होने, आदिवासी और दलित अधिकारों से जुड़े मामलों को सदन में जोरदार तरीके से उठाने का निर्णय लिया गया। मनरेगा में पूरी मजदूरी सुनिश्चित करने और कथित भ्रष्टाचार पर जवाबदेही तय करने की मांग भी कांग्रेस विधायक दल ने रखी। अंत में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल जनता के मुद्दों पर तथ्यों और प्रमाणों के साथ सरकार को घेरने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बजट सत्र सरकार की जवाबदेही तय करने का मंच बनेगा।

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