मोहन सरकार ने साधे एक तीर से कई निशाने

  • अनुभवी और तेजतर्रार अधिकारियों को लगाया फ्रंट पर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
कल से मप्र विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे दो दिन पहले सरकार ने प्रशासनिक सर्जरी कर सीरप कांड, आबकारी, आयुष्मान भारत योजना जैसे मामला को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देने की कोशिश की है। दरअसल, सरकार ने आकार में छोटी पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक सर्जरी कर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। सरकार ने जहां विपक्ष को बैकफुट पर लाने की कोशिश की है, वहीं अनुभवी और तेज तर्रार अधिकारियों को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने फ्रंट पर लगाया।
गौरतलब है कि विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा। इसके लिए पार्टी ने विभागवार अफसरों की कार्यप्रणाली पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी की है। जाहिर है कि इसमें छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सीरप से 25 बच्चों की मौत, शराब कारोबारी सोम समूह पर कार्रवाई और आयुष्मान भारत योजना के संचालन को लेकर उठ रहे सवाल परेशानी खड़ी कर सकते हैं। प्रशासनिक सर्जरी के माध्यम से संदेश देने का काम किया गया। सरकार कफ सीरप, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल प्रदाय, आयुष्मान भारत योजना के संचालन के लिए अस्पतालों की संबद्धता और आबकारी से जुड़े मामलों को लेकर निशाने पर है। विधानसभा सत्र में कांग्रेस ने इनसे संबंधित प्रश्न तो लगाए ही हैं, इंटरनेट मीडिया पर भी घेराबंदी हो रही है। आरोप यह लग रहे हैं कि सरकार ठोस कदम उठाने से बच रही है। मुख्यमंत्री ने 12 अधिकारियों के तबादले कर बड़ा संदेश देने का काम किया।
भरोसे मंद अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी
अनुभवी और तेजतर्रार अधिकारियों को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने फ्रंट पर लगाया। 2009 बैच के अधिकारी मनीष सिंह को सरकारी कार्यक्रम और योजनाओं की ब्रांडिंग का जिम्मा देकर भरोसा जताया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में बड़ा बदलाव कर अनुभवी और कामकाज को लेकर बेहद गंभीर अधिकारी अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को जिम्मा सौंपा है। वे कृषि उत्पादन आयुक्त भी हैं और इस समय वर्ष 2026 में मनाए जा रहे कृषि वर्ष का रोडमैप तैयार करने में लगे हैं। पर्यावरण को पटरी पर लाने का दायित्व भी पहले की तरह निभाते रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव ने पर्यावरण से जुड़ी अनुमतियों को लेकर सिया की आपत्ति और डीम्ड परमिशन से उठे विवाद को सुलझाने का दायित्व भी उन्हें ही सौंपा था। आधी रात आईएएस अधिकारियों के तबादले की वजह सूची में बार-बार छेड़छाड़ और बदलाव को बताया गया है। आयुक्त जनसंपर्क के पद पर कई दौर पर विचार चला। अंतिम क्षणों में नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे का नाम पर भी विचार किया, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा मनीष सिंह के नाम पर अंतिम वीटो लगाने के बाद सूची फाइनल हुई। सूत्रों का कहना है कि आबकारी आयुक्त सरकार का भरोसेमंद होता है। अभिजीत अग्रवाल ने दो बार आबकारी नीति बनवाई, जो सरकार के राजकोष को भरने का बड़ा माध्यम है। 2026 की नीति भी तैयार हो चुकी है। बड़े शराब कारोबारी समूह सोम ग्रुप के दो लाइसेंस बीते दिनों निलंबित किए गए और इसके आदेश में महाधिवक्ता की राय का उल्लेख किया गया। इसे लेकर राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने सवाल खड़े किए लेकिन यह कोई पहला अवसर नहीं है जब ऐसे हुआ हो। ओबीसी आरक्षण को लेकर जारी आदेश में भी महाधिवक्ता की राय का उल्लेख किया गया था। अग्रवाल को राज्य सहकारी विपणन संघ को प्रबंध संचालक बनाया गया है। यह संघ खाद की व्यवस्था करने के साथ उपार्जन की बड़ी एजेंसी है। वहीं, मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र दीपक सक्सेना को जनसंपर्क के बाद आबकारी आयुक्त जैसा बड़ा दायित्व दिया है क्योंकि उन्हें ही आबकारी नीति को क्रियान्वित कराना होगा। संदीप यादव मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में शुमार होते हैं। उन्हें स्वास्थ्य विभाग से वन जैसे बड़े विभाग में पदस्थ किया है। जिसके पास मुख्यमंत्री के कई ड्रीम प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन का दारोमदार है। इसी कारण उन पर भरोसा जताया है। आयुक्त जनसंपर्क के पद पर मनीष सिंह को पदस्थ कर मोहन सरकार ने अपनी छवि और संवाद के तौर-तरीकों में बदलाव का साफ संदेश दिया है। शिवराज सरकार में उन्हें ऐसे कठिन समय में सरकार की छवि सुधारने की जिम्मेदारी दी गई थी, जब भाजपा सरकार भारी एंटी इनकमबेंसी का सामना कर रही थी। इन दिनों भी सरकार के कामकाज को जिस गति से नीचे तक पहुंचाने का काम जनसंपर्क के पास है, उसे और सक्रिय करने की आवश्यकता थी। दीपक सक्सेना ने भी सरकार की छवि चमकाने का बेहतर प्रयास किया। उन्हें परिणाम देने वाला अधिकारी माना जाता है। वहीं अब सरकार ने अनुभवी आईएएस मनीष सिंह पर भरोसा किया है। उन्होंने शनिवार को कामकाज संभाल लिया।

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