- 58 करोड़ के बैंक लोन फ्रॉड में ईडी की कार्रवाई

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की इंदौर यूनिट ने रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड) की 10.15 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को कुर्क कर लिया है।
जब्त की गई ये सभी संपत्तियां जमीन के रूप में हैं, जो कंपनी के नाम पर दर्ज थीं। पूरा मामला इंदौर के यूको । बैंक के साथ हुई 58 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़ा है। ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने फर्जी और हेराफेरी से तैयार दस्तावेजों के आधार पर बैंक से क्रेडिट सुविधाएं और लेटर ऑफ क्रेडिट हासिल किए थे। इससे लोन लेने के बाद कंपनी ने वास्तविक व्यापार नहीं किया और रकम को अलग अलग शैल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में इस रकम को निजी खातों में भेज दिया गया। ईडी की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कंपनी ने बैंक से लिए गए पैसों को व्यापार में लगाने के बजाय अपनी ही सहयोगी और ग्रुप की कंपनियों में निवेश के नाम पर डायवर्ट कर दिया। इसे छिपाने के लिए कई शैल कंपनियों का जाल बुना गया। कोई जांच एजेंसी इस हेराफेरी को पकड़ न सके इसलिए पैसे को कई स्तरों पर घुमाया गया। इसे लेयरिंग कहा जाता है। इसका मकसद यही था कि पैसे के स्रोत की जानकारी को छिपाया जा सके। बैंक से लोन के रूप में लिए गए इस 58 करोड़ रुपए को बाद में बेशकीमती प्रॉपर्टी खरीदने में खर्च किया गया। इस मामले में बैंक की शिकायत पर सीबीआई की भोपाल ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। इससे पहले रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के ठिकानों पर पिछले साल दिसंबर में ईडी की टीम ने छापे मारे थे।
हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में भी 65 लाख की प्रॉपर्टी कुर्क
ईडी ने शुक्रवार को ही एक अन्य कार्रवाई में इंदौर की नवभारत गृह निर्माण सहकारी संस्था में हुए करोड़ों के जमीन घोटाले के दो आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। ईडी ने इस संस्था के श्रीकांत घंटे और सुभाष दुबे के नाम पर दर्ज 64.16 लाख रुपए की प्रॉपर्टी अटैच कर ली है। इसमें एक रिहायशी मकान और प्लॉट शामिल है। ईडी की पड़ताल में सामने आया कि इस संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और बोर्ड के सदस्यों ने मिलकर संस्था के सदस्यों को ही ठग लिया था। इन पदाधिकारियों ने सदस्यों के पैसे से जो जमीन खरीदी, उसे धोखाधड़ी से दूसरों बेच दिया गया। इसके बाद इस रकम का गबन करने के लिए जमीन की बिक्री से आई रकम का रिकॉर्ड जानबूझकर नष्ट कर दिया गया। इस मामले में ईडी ने एमजी रोड थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
