बैटरी स्टोरेज सिस्टम से मप्र को मिलेगी सस्ती बिजली

  • परियोजना के लिए राज्य के चार प्रमुख हाई वोल्टेज सबस्टेशनों का चयन

गौरव चौहान
मप्र बिजली ट्रांसमिशन में बड़ी क्रांति करने जा रहा है. अगर प्रदेश सरकार का यह प्रयोग सफल रहा तो, भविष्य में किसानों को बड़ी राहत मिलेगी. 24 घंटे बिजली मिलने से किसानों को सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए सस्ती बिजली मिल सकेगी. बिजली सब्सिडी घटाने में भी मदद मिलेगी। यानी शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्र दिन-रात जगमगाएंगे, लोगों को कम दाम में 24 घंटे बिजली मिलेगी. इतना ही नहीं यह प्रयोग पर्यावरण के लिए भी बहुत असरदार होगा. प्रदेश ग्रीन एनर्जी का हब बन जाएगा. मप्र में सौर और पवन जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बनने वाली बिजली को अब सुरक्षित रखकर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए राज्य में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की बड़ी परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं।
दरअसल, मप्र में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने और सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। राज्य में कुल 750 मेगावॉट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी, जिनसे करीब 3900 करोड़ का निवेश आने की संभावना है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब सौर ऊर्जा उपलब्ध न ही जैसे सुबह-शाम के पीक समय या रात में-तब भी बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इससे बिजली कटौती कम होगी और ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी। परियोजना के लिए राज्य के चार प्रमुख हाई वोल्टेज सब स्टेशनों का चयन किया गया है। इनमें बिरसिंहपुर (पाली), बीना, सेंधवा और राजगढ़-ब्यावरा शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर 220 केवी स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे, ताकि पूरे प्रदेश में संतुलित तरीके से बिजली आपूर्ति की जा सके।
यह है बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें बिजली को स्टोर किया जा सकता है। जैसे दिन में जब सौर प्लांट से ज्यादा बिजली बनती है, तो उसे सीधे उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इस अतिरिक्त बिजली को बैटरी में जमा कर लिया जाता है, ताकि रात में या मांग बढऩे पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। इससे ग्रिड में संतुलन बना रहता है और बिजली की लगातार आपूर्ति हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैटरी स्टोरेज भविष्य की ऊर्जा प्रणाली का अहम हिस्सा है। इससे न केवल बिजली की विश्वसनीयता बढ़ती है बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग भी अधिक प्रभावी हो जाता है। राज्य में चार हाईवोल्टेज सब स्टेशनों पर वे परियोजनाएं लगेगी – बिरसिंहपुर (पाली) सबस्टेशन बीना सबस्टेशन सेंधवा सबस्टेशन और राजगढ़-ब्यावरा सबस्टेशन में यह प्रोजेक्ट लयए जाएंगे। इन परियोजनाओं से 24 घंटे स्थिर बिजली आपूर्ति संभव होगी। सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा, बिजली कटौती में कमी आएगी, राज्य में लगभग 3900 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और रोजगार व उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
महंगी थर्मल बिजली पर निर्भरता कम होगी
परियोजना के तहत डेवलपर्स सौर ऊर्जा से बैटरियों को चार्ज करेंगे और जरूरत के समय बिजली ग्रिड में देंगे। इससे पीक डिमांड के दौरान महंगी थर्मल बिजली पर निर्भरता कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम बिजली लागत को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। इस पूरी योजना का क्रियान्वयन पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जो राज्य में बिजली खरीदने वाली मुख्य एजेंसी है। कंपनी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई सुविधाएं भी दे रही है, जैसे भूमि उपलब्ध कराना और ग्रिड से चार्जिंग के लिए व्यवस्था करना। मप्र में इस तरह की बड़ी परियोजनाएं शुरू होना ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न सिर्फ बिजली व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। आने वाले वर्षों में राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजनाओं के लिए विस्तृत तकनीकी, सुरक्षा और संचालन संबंधी मानक निर्धारित किए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाना, बिजली की गुणवता सुधारना और बैटरी आधारित ऊजार्जभडारण प्रणाली को सुरक्षित एवं टिकाऊ बनाना है। इन नियमों के तहत डेवलपर्स को सुरक्षा, परीक्षण, मॉनिटरिंग और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े कई अनिवार्य प्रावधानों का पालन करना होगा।

Related Articles