मप्र में सरकारी बस सेवा फिर से शुरू करने की तैयारियां जोरों पर

सरकारी बस सेवा
  • यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
करीब 20 साल बाद मप्र में सरकारी बस सेवा फिर से शुरू होने जा रही है। अप्रैल तक मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा के तहत बसें सडक़ों पर उतरेंगी, जिससे निजी बसें भी एक ही सिस्टम (अंब्रेला) के तहत संचालित होंगी और यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था के बाद बसों का संचालन तो प्राइवेट बस ऑपरेटर ही करेंगे लेकिन उनके ऊपर नोडल कंपनियां होंगी जो एक राज्य स्तरीय संगठन के नीचे काम करेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सार्वजनिक परिवहन वाली मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत जन-बस को सडक़ पर उतारने का खाका तैयार हो गया है। प्रदेश भर में कंपनियां बनाने से लेकर बसों के मार्ग चिह्नित करने का काम लगभग पूरा हो गया है। अब सिर्फ गांव-गांव, शहर-शहर तक सुगम परिवहन सेवा के लिए बसों का इंतजाम करना शेष है। अगले एक या दो महीने के भीतर बसों को सडक़ पर उतारने का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अप्रैल 2026 में प्रदेश में फिर से सार्वजनिक परिवहन की बसें दौडऩा शुरू हो जाएंगी।
राज्य स्तरीय कंपनी बनाई गई
मौजूदा स्थिति में प्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर और रीवा में सिटी बसों का संचालन हो रहा है। सिटी बसों के संचालन के लिए इन शहरों में पहले से कंपनियां हैं। अब ये कंपनियां परिवहन विभाग के नियंत्रण में आ गई हैं। संभागीय स्तर पर जन-बस का नियंत्रण इन्हीं कंपनियों के पास रहेगा। हालांकि संभागीय कंपनियों का मालिकाना हक अभी भी नगरीय प्रशासन विभाग के पास है। जल्द ही मालिकाना हक परिवहन विभाग को मिलेगा। सभी संभागीय कंपनियों पर नियंत्रण के लिए राज्य स्तरीय कंपनी मप्र यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाई गई है। कंपनी में एमडी समेत अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति हो गई है। सभी कंपनियां पीपीपी मोड पर काम करेंगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए सरकार एक भी बस नहीं खरीदेगी। बल्कि निजी बस ऑपरेटरों से बसों का अनुबंध किया जाएगा।
सुगम परिवहन सेवा पीपीपी मोड
 खास बात यह है कि मौजूदा स्थिति में मप्र यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पास एक भी बस नहीं है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का पूरा खाका निजी या पीपीपी मोड पर बसों के संचालन पर तैयार किया गया है। यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सबसे बड़ी चुनौती बसों का इंतजाम करने की है। क्योंकि कुछ बस ऑपरेटरों ने परिवहन विभाग द्वारा लिए गए कुछ फैसलों पर आपत्ति लगाई है। यह भी संभावना है कि वित्तीय हित प्रभावित होने पर निजी बस ऑपरेटर न्यायालय की शरण ले सकते हैं। मौजूदा स्थिति में बस संचालन के लिए डिजिटल फ्रेमवर्क तैयार हुआ है। सड़क पर कुछ नहीं है। कंपनी ने किसी भी संभाग में जन बस को प्रायोगित तौर पर नहीं चलाया है।

Related Articles