
सरकार नहीं सुनती तो मन टूट जाता है, लेकिन मैं 20 साल से डटा रहा: भार्गव
रहली सीट से भाजपा के विधायक और भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव का दर्द एक बार फिर सार्वजनिक मंच से छलक पड़ा। छिरारी गांव के एक कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस-भाजपा की सरकार के संघर्ष की कहानी सुनाई। कहा, राजनीति में उपेक्षा भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को भावनात्मक रूप से याद किया और कहा, 20 साल तक लगातार कठिन परिस्थितियों को सहा है, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते। भार्गव वर्तमान में प्रदेश के सबसे सीनियर विधायकों में हैं। बुंदेलखंड का रहली सीट में 9 बार विधायक ने गए और यह सीट वर्तमान में भाजपा का गढ़ है। वे इससे पहले भी कई बार सार्वजनिक मंचों पर अपना दर्द बयां कर चुके हैं। भार्गव ने खुलासा किया कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। दिग्विजय ने कहा था कि वहां क्या कर रहे हो, कांग्रेस में आ जाओ, मंत्री बना देंगे। तब मैंने साफ कहा कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। बता दें, रहली से भार्गव 9वीं बार विधायक चुने गए थे, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई।
एक सप्ताह में दूसरी बार 5000 करोड़ का सरकार ने लिया कर्ज
विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने और अनुपूरक बजट के पहले सरकार ने 5 हजार करोड़ का कर्ज और ले लिया है। पिछले एक सप्ताह में सरकार ने दूसरी बार कर्ज लिया है। इसके पहले 4 फरवरी को ही सरकार ने 5300 करोड़ का कर्ज लिया था। सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से तीन किस्तों में यह कर्ज ले रहा है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा अब तक 67,300 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है। उल्लेखनीय है बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू हो रहा है और 18 को बजट पेश होगा।
निर्मला सप्रे मामले में स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष सिंघार से की चर्चा
सागर की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के दल बदल का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस विषय पर मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और संबंधित पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। दरअसल, मप्र हाईकोर्ट की डबल बेंच में इस मामले की सुनवाई चल रही है, जहां सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया है कि प्रकरण फिलहाल स्पीकर के पास विचाराधीन है और जल्द ही इस पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्थगन मंजूर कर लिया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है। तब तक यह देखा जाएगा कि अध्यक्ष इस पर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं।
घोषणा के साथ ही विवादों में आई जिला भाजपा की टीम, होल्ड करनी पड़ी लिस्ट
करीब एक साल बाद जारी हुई भोपाल जिला भाजपा पदाधिकारियों की नई टीम घोषित होने के साथ ही विवादों में घिर गई। भोपाल जिलाध्यक्ष रविंद्र यति ने मंगलवार को 36 सदस्यीय पदाधिकारियों की सूची जारी की। इनमें 8 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री, 8 मंत्री समेत कोषाध्यक्ष, सह कोषाध्यक्ष, कार्यालय मंत्री, दो सह कार्यालय मंत्री, आईटी प्रभारी व 3 सह आईटी प्रभारी, सोशल मीडिया प्रभारी व 3 सह प्रभारी, कार्यालय प्रभारी व 4 मन की बात प्रभारियों की घोषणा की गई थी। कुछ ही देर में सूची वायरल हो गई नेताओं का विरोध शुरू हो गया। सबसे ज्यादा विरोध महामंत्री बनाए गए पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह के समर्थक सचिन दास बब्बा के नाम को लेकर हुआ। बब्बा ने पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह के विरुद्ध निर्दलीय चुनाव लड़ा था। बब्बा पर ध्रुव नारायण सिंह का टिकट कटने पर वार्टी कार्यालय में तोडफ़ोड़ करने के आरोप भी लगे थे। महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष चंदना जाचक के विरूद्ध पार्षद का निर्दलीय चुनाव लडऩे वाली शिखा मोनू गोहिल के नाम पर भी विवाद हुआ। इनके पति मोनू गोहिल निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। जिला उपाध्यक्ष राजू अनेजा व मन की बात सह प्रभारी राजेश खटीक की पत्नी नगर निगम में पार्षद हैं। 4 एमआईसी सदस्य टीम में रखे गए हैं।
