रजिस्ट्री के लिए अब अनिवार्य होगा पंजीयन नंबर

  • रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने की कवायद

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश में किसी भी बिल्डर या डेवलपर को फ्लैट या मकान बेचने से पहले सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि उसके प्रोजेक्ट का भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) में पंजीयन है या नहीं। नई व्यवस्था के तहत अब विक्रय अनुबंध में रेरा पंजीयन नंबर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इस नियम को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। यदि किसी संपत्ति के विक्रय अनुबंध में रेरा पंजीयन नंबर का उल्लेख नहीं होगा, तो उप रजिस्ट्रार उस संपत्ति की रजिस्ट्री करने से मना कर सकेगा। इस कदम से उन बिल्डरों पर रोक लगेगी जो अब तक उपभोक्ताओं को धोखे में रखकर बिना पंजीयन के ही मकान या फ्लैट बेच देते थे।
मप्र में अब कोई भी बिल्डर या डेवलपर तब तक ग्राहकों को प्लॉट या मकान नहीं बेच सकेगा, जब तक वह रेरा में पजीकृत नहीं होगा। अब रजिस्ट्री तभी संभव हो सकेगी, जब बिक्रय अनुबंध पर रेरा पंजीयन का नंबर लिखा होगा। गौरतलब है कि राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश से ऐसी शिकायतें आती रही है कि कई बिल्डर या डेवलपरों द्वारा बिना रेरा पंजीयन के बाद कालोनी काटी जा रही है। उनके द्वारा प्लॉट या मकान बनाकर बेचे जा रहे हैं। इससे ये निर्माण पूरी तरह से अवैध कालोनी का स्वरूप लेते जा रहे हैं। इसके बाद खरीदारों को कई तरह की सुविधाएं नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। ऐसे कई उदाहरण या मामले सामने आए हैं कि बिल्डर या डेवलपर मनमर्जी से कागजों में कॉलोनी बेचकर गायब हो जाते हैं। प्रदेशभर में ऐसी कॉलोनियां विकसित की जा चुकी है, जहां पर तमाम असुविधाएं हैं और रहवासियों को शासन-प्रशासन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई स्थानों पर ऐसी स्थिति की वजह से विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। उल्लेखनीय है कि रेरा द्वारा बिल्डर या डेवलपर को साफ तौर पर कहा जाता है कि जहां कॉलोनी विकसित की जा रही है, वहां पर सड़क, पानी, बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस पर सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि रेरा पंजीकरण के बिना किसी भी प्लॉट या आवास की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी।
धोखाधड़ी और अवैध कॉलोनियों पर लगाम
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में कई बिल्डर रेरा नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। बिना पंजीयन के बेचे गए इन मकानों के कारण बाद में उपभोक्ताओं को मूलभूत सुविधाओं और मालिकाना हक के लिए कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, नियमों के उल्लंघन पर रेरा द्वारा भारी जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन इसके बावजूद कई बड़े प्रोजेक्ट बिना पंजीयन के ही पूरे कर लिए जाते हैं। अब रजिस्ट्री के स्तर पर ही रेरा नंबर की अनिवार्यता से इस खेल पर लगाम लगेगी। रेरा के पास आए आवेदनों के आंकड़े बताते हैं कि बिल्डर अब भी नियमों के पालन में कोताही बरत रहे हैं। वर्ष 2021-22 से अब तक पिछले पांच वर्षों में रेरा के पास कुल 6,323 आवेदन पहुंचे, जिनमें से केवल 3,398 (लगभग आधे) ही स्वीकृत हुए। करीब 981 आवेदनों को निरस्त किया गया है। हर साल 50 से 82 प्रतिशत तक आवेदनों का निराकरण तो हो रहा है, लेकिन स्वीकृत पंजीयन की कम संख्या स्पष्ट करती है कि कई प्रमोटर अब भी बिना वैध अनुमति के निर्माण कार्य कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के बीच विश्वास का संकट बना हुआ है।
अन्य शहरों में शाखाएं खोलने की मांग
प्रदेश के रियल एस्टेट कारोबार के विस्तार को देखते हुए वर्तमान में रेरा की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यही कारण है कि लंबे समय से भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी रेरा की शाखाएं खोलने की मांग की जा रही है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था और शाखाओं के विस्तार से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी और रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। रेरा के विशेष सचिव राजेश बहुगुणा का कहना है कि बिल्डर अगर बिना रेरा पंजीयन के मकान, फ्लैट विक्रय करता है तो जुर्माने के साथ सजा का भी प्रविधान है। रेरा एक्ट उपभोक्ता के अधिकार सुरक्षित करने के लिए ही बना है। उपभोक्ताओं को भी इसके प्रति जागरूक होना होगा ताकि वे बिना रेरा पंजीयन के संपत्ति न खरीदें। पंजीयन विभाग से साफ तौर पर कहा गया कि अगर एंग्रीमेंट में रेरा नंबर नहीं है, तो उपपंजीयक रजिस्ट्री करने से मना कर दें। जानकारों का कहना है कि इस नए नियम से जहां बिल्डर नियम विरुद्ध कॉलोनी, मकान या प्लॉट नहीं बेच पाएंगे। इससे अवैध कालोनी काटने वाले बिल्डरों पर भी नकेल कसेगी, तो खरीददारों को भी राहत मिलेगी और वे फर्जीवाड़े या अपने साथ होने वाली धोखाधड़ी से भी बच जाएंगे। रेरा कानून में पहले से ही ऐसे मामलों में भारी जुर्माना से लेकर जेल तक की सजा का प्रावधान उल्लेखित है। लेकिन कई जगह ऐसे मामले सामने आने से पहले से कथित बिल्डर या डेवलपर उनके खिलाफ एक्शन होने से पहले ही गायब हो जाते है। इस नए कानून से अब रजिस्ट्री के समय रेरा नंबर की जांच हो जाएगी और खरीददारों को भी उनका हक मिल सकेगा। रेरा के विशेष सचिव राजेश बहगुणा का कहना है कि एक्ट उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को भी जागरुक रहना पड़ेगा और उन्हें बिना रेरा पंजीयन वाली कोई भी किसी भी तरह की संपत्ति खरीदने बचना होगा। नया नियम घर या प्लॉट खरीदने वालों के लिए जहां सुरक्षा कवच बनेगा, तो रियल एस्टेट बाजार में भी पारदर्शिता, भरोसा और जवाबदेही भी मजबूत होगी।

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