डिजिटल सिस्टम पर लगा ग्रहण ४ साल पहले लागू हुई थी व्यवस्था

  • चार साल में 15000 ई-एफआईआर लेकिन प्रकरण केवल 1500 दर्ज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश मैं तकनीक के जरिए पुलिसिंग को आसान बनाने का सपना स्टाफ, कागज, कानून और सर्वर के बीच उलझ गया है। प्रदेश में पिछले चार साल के दौरान 15,000 ई-एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की गईं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 1500 ही नियमित एफआईआर बन सकीं। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रदेश में 90 फीसदी से ज्यादा ऑनलाइन ई-एफआईआर पुलिस स्टेशन की फाइलों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ गईं। मध्य प्रदेश पुलिस ने अक्टूबर 2021 में ई-एफआईआर पोर्टल शुरू किया था। इसका मकसद था कि आम जनता को चोरी जैसे अपराधों के लिए थाने के चक्कर काटने से बचाना।
ई एफआईआर के जरिए 15 लाख तक की वाहन चोरी और 1 लाख तक की सामान्य चोरी की शिकायत ऑनलाइन दर्ज कराई जा सकती थी। इस ई-एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलने के लिए एक शर्त रखी गई थी। नियम के अनुसार ऑनलाइन एफआईआर कराने वाले फरियादी को शिकायत के 3 दिनों के भीतर संबंधित थाने में जाकर अपनी शिकायत संबंधी विवरण देने होते थे। इसके बाद ई-एफआईआर को नियमित एफआईआर के रूप में दर्ज कर पुलिस छानबीन शुरू करती थी। हालांकि ये व्यवस्था फेल रही क्योंकि कई थानों में जहां पुलिसकर्मी ऑनलाइन शिकायतों को लेकर गंभीर नहीं दिखे। वहीं कई बार फरियादी के थाने जाने पर उसे स्टाफ का उचित सहयोग नहीं मिलता। इसके अलावा कई मामलों में फरियादी थाने पहुंचने में लेट हो गया तो तीन दिन बाद ई-एफआईआर खुद रद्द हो गई। ऐसे में पुलिस स्टाफ ने देरी से आने वाले आवेदकों की दरख्वास्त रद्दी की टोकरी में डाल दी। इन्हीं वजहों से ई-एफआईआर का प्रयोग प्रदेश में सफलता की सीढ़ी नहीं चढ़ पाया।
अब ई-जीरो एफआईआर शुरू, 30 दिन की लिमिट
ई-एफआईआर व्यवस्था की खामियों को दूर करने के लिए अब एमपी में ई-जीरो एफआईआर की नई व्यवस्था शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री ने 25 दिसंबर को ग्वालियर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के दौरान इसका औपचारिक उद्घाटन किया था और पहली ई-जीरो एफआईआर कार्रवाई के लिए एमपी के सीएम डॉ मोहन यादव को सौंपी थी। यह व्यवस्था केंद्र सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दिल्ली पुलिस में शुरू की थी। इसके बाद इसे एमपी में लागू किया गया है। ई-जीरो एफआईआर में यह अहम बदलाव किया गया है कि इसमें चोरी से लेकर आधुनिक साइबर फ्रॉड तक की ऑनलाइन शिकायत देश के किसी भी कोने से की जा सकती है। इसमें भी तीन दिन के भीतर फरियादी को थाने आना है, लेकिन एक बड़ी राहत यह है कि आवेदक के न पहुंचने पर पुलिस उसे नोटिस जारी कर 30 दिन का अतिरिक्त समय देती है। इसके बाद ही ई-जीरो एफआईआर निरस्त की जाती है। प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों देवास के एक स्टील कारोबारी के साथ हुई लाखों रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी को शिकायत दर्ज करने के 12 घंटे से भी कम समय में सुलझा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर रकम रिवकर करा दी थी। ई-एफआईआर के बजाय ई-जीरो एफआईआर को लेकर पुलिस मुख्यालय भी सख्त हुआ है। डीजीपी कैलाश मकवाना ने तो ई-जीरो एफआईआर पर कार्रवाई के लिए जोन के सभी डीआईजी एवं भोपाल इंदौर में एडिशनल सीपी स्तर के अफसर को इसकी रेगुलर मॉनिटरिंग करनी है।

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