
वॉशिंगटन। अमेरिका ने वॉशिंगटन में पहला महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित किया, जिसमें 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक का मकसद दुनिया भर में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और सुरक्षा सुनिश्चित करना और चीन पर निर्भरता कम करना था। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे ऐतिहासिक बैठक बताया। साथ ही यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी विकास के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कई देशों के साथ नए महत्वपूर्ण खनिज ढांचा पर समझौते कर रहा है, जिससे निजी कंपनियों का निवेश बढ़े और आपूर्ति चैन सुरक्षित हो।रुबियो ने कहा कि खनन को कभी कम महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि यह ग्लैमरस नहीं था, लेकिन इस पर ध्यान न देने से अमेरिका अपनी आर्थिक सुरक्षा खो बैठा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये खनिज आधारभूत संरचना, उद्योग और राष्ट्रीय रक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं। रुबियो ने कहा कि चीन इस समय दुर्लभ पृथ्वी खनिज और प्रसंस्करण में वर्चस्व रखता है। इसलिए अमेरिका चाहता है कि एक जैसे सोच वाले देशों के बीच आपूर्ति चैन को विविध और सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए है। इससे हर देश के लिए खनिज सुलभ होंगे और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस बैठक में एस. जयशंकर ने वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक निर्भरता और खनिजों की एक जगह सघनता वैश्विक आपूर्ति के लिए जोखिम पैदा करती है। ऐसे जोखिम को कम करने के लिए देशों के बीच संगठित अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। जयशंकर ने भारत की तरफ से की जा रही पहलों का भी उल्लेख किया। इसमें नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और जिम्मेदार वाणिज्य जैसी योजनाएं शामिल हैं, जो देश की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और भरोसेमंद बनाने में मदद करती हैं। उन्होंने भारत की ओर से FORGE पहल के समर्थन की भी जानकारी दी। यह पहल महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है। इस बैठक में जयशंकर की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब वैश्विक खनिज आपूर्ति और नीति निर्माण में सक्रिय और भरोसेमंद भागीदार बन गया है।
बता दें कि इस बैठक से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोजेक्ट वॉल्ट की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका में सामरिक महत्वपूर्ण खनिज भंडार बनाया जाएगा, जो जरूरी कच्चे माल को देश भर में सुरक्षित रखने में मदद करेगा। यह एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी होगी। दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि तेल की तरह ही महत्वपूर्ण खनिज भी वास्तविक और बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि देशों को साथ मिलकर समस्याओं का समाधान करना होगा और कीमतों में स्थिरता लाने की जरूरत है। गौरतलब है कि यह बैठक टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। अमेरिका और सहयोगी देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति चैन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
