जाति आधारित प्रकोष्ठ का गठन कर रही कांग्रेस

  • वोट बैंक बढ़ाने की खातिर पार्टी संविधान दरकिनार

गौरव चौहान
मप्र में कांग्रेस हर हाल में सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी हुई है। पार्टी की कोशिश है कि अधिक से अधिक वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित किया जाए। ऐसे में कांग्रेस पार्टी द्वारा जाति-आधारित प्रकोष्ठों का गठन कर पार्टी के समावेशी और समानतावादी संविधान के वैचारिक आधार के विपरीत का किया जा रहा है। कांग्रेस की इस तरह की रणनीति मुख्य रूप से चुनावी लाभ और पिछड़ते हुए आधार को पुन: मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।  भाजपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस की यह रणनीति विकासात्मक मुद्दों से ध्यान भटकाने और जाति-आधारित राजनीति का सहारा लेने का एक सोची-समझी कोशिश है, जिसे लेकर अक्सर आरोप लगाए जाते हैं कि यह जातिवाद को बढ़ावा दे सकती है।
सामाजिक न्याय पर केंद्रित रुख के साथ, कांग्रेस ने अपने गिरते हुए जनाधार को वापस पाने के लिए इन प्रकोष्ठों को एक टूल के रूप में उपयोग करने की कोशिश की है। जबकि कांग्रेस पार्टी के सांगठनिक ढांचे में जाति आधारित इकाइयों के गठन का विकल्प नहीं रहा है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में पार्टी जाति आधारित प्रकोष्ठ का गठन कर रही है। पार्टी के संविधान के अनुसार केवल विभाग और प्रकोष्ठ ही गठित किए जा सकते हैं लेकिन प्रदेश संगठन ने सात समाजों से जुड़े प्रकोष्ठ गठित कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इसे व्यवसाय संबंधित प्रकोष्ठ बता रहे हैं जबकि कांग्रेस के ही कुछ नेताओं का मानना है कि यह निर्णय पार्टी के धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। इससे जातिवाद को बढ़ावा मिलता है।
जातिगत राजनीति का हिस्सा
जानकारों का कहना है कि जाति आधारित प्रकोष्ठ गठन से समाज में विभाजन बढ़ता है और यह चुनावी लाभ के लिए जातिगत राजनीति का हिस्सा है। बता दें, यूजीसी के समानता से जुड़े नए नियमों के कारण जातिवाद पर चर्चा ने फिर जोर पकड़ लिया है। हालांकि इन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अब तक कांग्रेस में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आदिवासी विभाग होते हैं लेकिन इस बार प्रदेश कांग्रेस ने समाज समन्वय प्रकोष्ठ के अंतर्गत अलग-अलग समाजों के लिए समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। इनमें बंगाली समाज के समन्वयक मिथुन विश्वास, बंजारा समाज समन्वयक मांगीलाल नायक, तैलिक साहू राठौर समाज समन्वयक हितेष साहू, सर्व विश्वकर्मा समाज कल्याण समन्वयक रमेश चंद्र विश्वकर्मा, स्वर्ण कला समन्वयक राम मनोहर सोनी, कोली कोरी समाज समन्वयक पूनम वर्मा और रजक समाज का समन्वयक संजय मालवीय को नियुक्त किया है। बता दें, सवर्ण समाज के प्रति भेदभाव बढ़ाने वाले यूजीसी के नए नियमों से भाजपा को भी नुकसान झेलना पड़ा है। कांग्रेस के ऐसे प्रकोष्ठ गठन के अलावा मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आदिवासियों को बरगलाने में लगे हैं कि वे हिंदू नहीं हैं। जनगणना में उन्हें अलग धर्म कोड की मांग करनी चाहिए। कांग्रेस के ही एक और विधायक फूल सिंह बरैया के जातिवादी बयान ने पार्टी के समक्ष संकट खड़ा कर दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दलित एजेंडा ने भी जातिवाद को बढ़ावा देने में आग में घी डालने का काम किया है। मप्र कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि ये प्रकोष्ठ पहले से बने हुए थे, उन्हीं को पुनर्जीवित किया गया है। संविधान से हटकर संगठन कोई काम नहीं करता है। ये सभी व्यवसाय आधारित प्रकोष्ठ हैं। कारोबार संबंधी समस्याएं स्वयं सुलझा लें इसलिए इनका गठन किया गया है। इसमें सभी धर्मों के लोग हैं।
मप्र कांग्रेस की मीडिया कमेटी भंग
मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव हुआ है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश कांग्रेस की मीडिया कमेटी को भंग कर दिया गया है। सभी प्रवक्ताओं को उनके कार्यभार से मुक्त कर दिया है। इस आशय का आदेश जारी हो गया है। दरअसल मध्य प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ता अब टैलेंट हंट के जरिए चुने जाएंगे। कार्यमुक्त किए गए प्रवक्ताओं को भी फिर प्रवक्ता बनना है तो इंटरव्यू देना होगा। 5 फरवरी से प्रवक्ताओं को लेकर टैलेंट हंट शुरू होगा। अगली नियुक्ति तक अब मीडिया विभाग द्वारा डिबेट के लिए नेता भेजे जाएंगे।

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