- मप्र सरकार के खर्च पर केंद्र की नजर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में केंद्रीय योजनाओं के लिए जो फंड मिलता है उसके खर्च पर केंद्र की नजर है। मप्र में केंद्र की जो योजनाएं चल रही है, उन पर खर्च की जाने वाली राशि का पूरा हिसाब-किताब केंद्र सरकार राज्य से लेगी। केंद्र सरकार ने 676 योजनाओं (सीएसएस) में मिलने वाली करीब 37 हजार करोड़ रुपए की राशि के खर्च पर अब एक नया नियम लागू किया है। अब राज्य सरकारों को खर्च का रिकॉर्ड दिखाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपयोगिता प्रमाण पत्र (ई-यूसी) जमा करना जरूरी होगा। यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया है। ई-यूसी जमा होने के बाद ही केंद्र सरकार आगे की राशि जारी करेगी। पहले उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजने में देरी के चलते कई योजनाओं का अनुदान रोक दिया गया था।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक पत्र में साफ कहा है कि अब सभी योजनाओं का खर्चा ई-यूसी पोर्टल के माध्यम से ही देना होगा। इससे पहले जो भौतिक (फिजिकल) प्रमाण पत्र होते थे, अब वो मान्य नहीं होंगे। सिर्फ ई-यूसी पोर्टल के जरिए ही प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे। राज्यों के मुख्य सचिव को इस नई व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मध्य प्रदेश को सीएसएस के तहत पीएम ऊषा योजना के लिए 400 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के बीएलसी घटक में 250 करोड़ रुपए, अमृत 2.0 के तहत 471 करोड़ रुपए, पीएम ई-बस सेवा के लिए 65 करोड़ रुपए और एकीकृत शिक्षा योजना के तहत 19 आदिवासी जिलों के 89 विकासखंडों के लिए राशि मिलने वाली है। पहले पेपर आधारित उपयोगिता प्रमाण (यूसी) जमा करने में महीनों लग जाते थे, जिससे यह पता लगाना मुश्किल था कि आवंटित राशि का वास्तव में खर्च हुआ या बैंक खातों में ही पड़ी है। डिजिटल सिस्टम के जरिए फिजिकल हस्तक्षेप कम होगा । आंकड़ों में हेर फेर नहीं हो सकेगा।
इसकी वजह से रुकी है राशि
जल जीवन मिशन के तहत नल से जल पहुंचाने के लिए 8561 करोड़ रुपए आने थे। हिसाब न मिलने जैसी अनियमितताओं की वजह से ये बड़ी राशि रोक दी गई है। कुछ मामलों में तो डुप्लिकेट वर्क सर्टिफिकेट जमा करने की शिकायतें आई हैं, जिनकी जांच की जा रही है। स्मार्ट सिटी के शहरी विकास योजनाओं में अच्छा प्रदर्शन नहीं दिखा है। स्मार्ट सिटी के लिए जो राशि मिली थी, उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक नहीं भेजा गया है। कृषि विभाग के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 1 हजार करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। ये पैसे अभी तक नहीं मिल पाए हैं। इसकी वजह यह है कि पिछले खर्चों के डिजिटल यूटिलिटी सर्टिफिकेट अभी तक नहीं मिल पाए हैं। शिक्षा योजनाओं के तहत फंड समय पर नहीं मिला। इससे स्कूलों के बुनियादी ढांचे का काम रुक गया है।
राशि के गलत उपयोग पर रोक
पहले राज्य सरकारें केंद्र से मिली राशि का इस्तेमाल तय योजना के अलावा भी करती थी। इसके लिए केंद्र से किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं समझी जाती थी। ऐसा खासतौर पर स्कूल शिक्षा, पंचायत और ग्रामीण विकास, और नगरीय विकास विभाग में 40 से 50 प्रतिशत मामलों में होता था। केंद्र का मानना है कि ई-यूसी व्यवस्था लागू होने से राशि का इस्तेमाल सिर्फ उसी काम के लिए किया जाएगा, जिसके लिए वो दी गई है। इससे अनुदान राशि का गलत इस्तेमाल रोका जा सकेगा। पिछले महीने तक राज्य के दो दर्जन विभागों को केंद्र से 10 महीने से कोई राशि नहीं मिली थी। इसका कारण एसएनएस स्पर्श योजना का लागू होना है। इस योजना से केंद्र की जो योजनाए है, उनमें 60:40 के अलावा 75:25 और 80:20 के अनुपात भी तय किए गए हैं। इनमें से सबसे प्रमुख 60:40 वाली योजना है। इसके तहत, केंद्र का हिस्सा 60 प्रतिशत तभी मिलेगा, जब राज्य अपनी हिस्सेदारी का 40 प्रतिशत राशि जमा करेगा।
