- दो कलेक्टरों के काम से जनता खुश…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र की धरती पर बेशक कोई बड़ा डकैत गिरोह नहीं बचा है, लेकिन जब भी चंबल का नाम आता है। तब बंदूकें, बीहड़ और डकैत गिरोहों का चित्र मस्तिष्क में आ जाता है। लेकिन इन दिनों चंबल में शहर से लेकर गांव और बीहड़ों तक दो जिलों के कलेक्टरों की काम की चर्चा जोरों पर है। इनमें मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ और दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े हैं। दोनों अधिकारियों की काम से जनता गदगद है। लोगों की समस्याओं का निराकरण फाइलों से नहीं मौके पर ही हो रहा है।
दोनों अधिकारी जनता के बीच बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन फर्क इतना है कि लोकेश जांगिड़ सोशल मीडिया के दौर में कैमरों की चकाचौंध से कोसों दूर हैं। जबकि दतिया कलेक्टर वानखेड़े सोशल मीडिया पर जबर्दस्त सक्रिय हैं। प्रदेश के बड़े जिलों के कलेक्टर जहां मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में यदाकदा ही दिखते हैं। वहीं मुरैना और दतिया के कलेक्टर हर जनजनवाई में रहते हैं। दोनों जिलों के स्थानीय ग्रामीण और पक्षकारों ने चर्चा में बताया कि जब कलेक्टर लोगों की बात सुनते हैं, तो उन्हें बराबर पर बैठाते हैं। ज्यादातर समस्याओं का निराकरण मौके पर ही होता है। जिले के किसी भी गांव में औचक निरीक्षण के लिए निकल जाते हैं। दोनों अधिकारियों ने अपने कार्यालय के दरवाजे आम लोगों के लिए खोल दिए हैं। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। गांव-गांव काम की चर्चा है। इसी तरह मुरैना कलेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा है कि ये पूर्व कलेक्टर राधेश्याम जुलानिया जैसे ही है। जुलानिया 29 साल पहले 1996 से 1998 तक मुरैना के कलेक्टर रहे हैं। जुलानिया दो साल पहले सेवानिवृत्ति हो चुके हैं, लेकिन मुरैना में उनके काम को लोग आज भी याद करते हैं। संभवत: राधेश्याम जुलानिया मुरैना के इतिहास के जनहित के कामों को लेकर सबसे दबंग कलेक्टर रहे हैं। उसके बाद लोकेश जांगिड़ के काम की जनता में चर्चा है।
जांगिड़ बिना बताए पहुंच जाते हैं गांव
लोकेश जांगिड़ 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे मुरैना, निवाड़ी के कलेक्टर भी रहे हैं। लोकेश जांगिड़ हफ्ते में कई गांवों में बिना पूर्व सूचना के पहुंच जाते हैं। सरकारी स्कूल, अस्पताल और निर्माणाधीन कामों का औचक निरीक्षण उनकी प्राथमिकता में है। गांव में चौपाल लगाकर मौके पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। खास बात यह है कि कलेक्टर की इस कार्यप्रणाली का सोशल मीडिया पर कोई बखान नहीं होता है। उनका कोई निजी सोशल मीडिया एकाउंट सक्रिय नहीं है। वहीं दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। कलेक्टर के रूप में यह उनका पहला जिला है। इससे पहले वे नगर निगम आयुक्त जबलपुर थे। वे सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहते हैं। उनके फेसबुक पेज पर 2 लाख 85 हजार फॉलोअर हैं। हर बैठक, लोगों से मिलने, अधीनस्थ अधिकारियों का निर्देश देने के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड हो रहे हैं। यहां तक के अधीनस्थों को निलंबित करने जैसे फैसले ऑन कैमरे ले रहे हैं। बताया गया कि वे अपने साथ कैमरा लेकर चलते हैं।
अधीनस्थों में कलेक्टरों का खौफ
दोनों जिलों में पटवारी, पंचायत एवं अन्य विभागों में अधीनस्थ अमले में कलेक्टरों का खौफ है। पटवारी अब काम नहीं अटका रहे हैं। यदि गलती से कोई शिकायत लेकर कलेक्टर के पास पहुंच गया तो काम होना तय है। साथ ही संबंधित को विधि संवत होने के बावजूद काम नहीं करने पर जवाब देना पड़ता है। स्थिति यह है कि आम लोग काम नहीं करने वाले सरकार अमले को कलेक्टर के पास शिकायत करने की बात कहने लगे हैं।
