
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में पेयजल पाइपलाइनों की ऑडिट कराएगी। जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि जल आपूर्ति परियोजनाओं में घटिया एचडीपीई (उच्च घनत्व पॉलीथीन) पाइपों के उपयोग तो नहीं किया गया है। सरकार ने पीएमओ और मुख्य सचिव को मिली शिकायत के उपरांत यह जांच कराने के निर्देश दिए है। जानकारी के अनुसार इंदौर में दूषित पानी की वजह से हुई मौतों के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव को एक शिकायत मिली है, जिसमें दावा किया गया है कि पाइपलाइन की दूषित सामग्री के कारण इंदौर और अन्य शहरों में जल प्रदूषण हुआ और इससे रहवासियों की मौतें हुई है।
शिकायत में कहा गया है कि जनवरी 2023 से भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा मध्य प्रदेश जल निगम, जल शक्ति मंत्रालय और राज्य के विभागीय अधिकारियों को एचडीपीई पाइपों में पुन: संसाधित या पुनर्चक्रित पॉलिमर से जुड़े जोखिमों के बारे में कई बार चेतावनी भेजी गई थी। लेकिन इस पर किसी भी स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पेयजल नेटवर्क का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा एचडीपीई पाइपों पर निर्भर है। कहा गया है कि कई स्थानों पर पाइप स्थापना से पहले ही खराब हो रहे हैं जिससे उनमें विषाक्त पदार्थों का रिसाव हो रहा है और दुर्गंध, खराब स्वाद, मैलापन पानी हो रहा है, जिसमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होने से पानी का सेवन करने पर दस्त, हैजा, पीलिया और टाइफाइड जैसी जल जनित बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। शिकायत में दावा किया गया है कि इंदौर के नगर निगम अधिकारी कई दिनों तक प्रदूषण के स्रोत की पहचान करने में विफल रहे, और कहा गया है कि पाइपलाइन ही मूल कारण है। इंदौर के अलावा सतना, रतलाम में भी इसी तरह की घटनाएं प्रशासनिक अनदेखी के कारण हुई है। इस संबंध में शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत एस भोंडवे ने कहा कि आरोपों की जांच की जा रही है। आयुक्त भोंडवे ने बताया, उनके द्वारा संबंधित विभाग के माध्यम से पाइपों का ऑडिट कराने का आदेश दिया गया है। इस पर पूरी नजर रखी जा रही है।
