डीओपीटी के सर्कुलर ने बढ़ाया मप्र में आईएएस का टोटा

  • पेशेवर रूप से अनुभवी बनाने के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे अफसर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में आईएएस अधिकारियों का पूरा कैडर 459 का है, लेकिन वर्तमान में 391 अधिकारी ही हैं। यानी तय कैडर से 68 कम। इसके बावजुद डीओपीटी के सर्कुलर के कारण मप्र के आईएएस अधिकारी लगातार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। इससे मप्र में आईएएस अधिकारियों का टोटा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में मप्र कैडर के करीब 44 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसका असर प्रदेश के काम-काज पर पड़ रहा है। हाल में शासन स्तर पर हुए तबादलों में 5-6 सचिव स्तर के अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से विभाग सौंपे गए। इसके बाद भी कई आईएएस अधिकारी ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक विभागों का प्रभार है।
दरअसल, आईएएस अफसरों को पेशेवर रूप से अनुभवी बनाने के लिए डीओपीटी से एक सर्कुलर जारी किया गया है। जिसके कारण आईएएस को प्रतिनियुक्ति पर जाना अनिवार्य हो गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि अनुभवी व्यवस्था बनाने के लिए 2007 के बाद सेवा में आने वाले अधिकारियों को ज्वाइंट सेक्रेटरी में इंपेनल होने से पहले सेंट्रल स्टॉफिंग स्कीम (सीएसएस) के तहत केंद्र सरकार में उप सचिव या डायरेक्टर स्तर पर कम से कम दो साल काम करना अनिवार्य होगा। इसे कैबिनेट की नियुक्ति समिति के निर्देश पर जरूरी किया गया है। इसी के बाद मप्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अफसर बढ़े हैं।
2024-25 में 14 आईएएस प्रतिनियुक्ति पर गए
डीओपीटी के सर्कुलर का असर ये है कि मप्र कैडर के 14 आईएएस अधिकारी 2024-25 में ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए हैं। हाल में मप्र हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर से स्वास्थ्य संचालक के पद पर भेजे गए डॉ. फटिंग राहुल (2012 बैच) ने भी प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया है।  वर्ष 2007 बैच के आईएएस अधिकारी श्रीमन् शुक्ला और स्वतंत्र कुमार सिंह को मप्र सरकार ने हरि झंडी दे दी है। केंद्र में पद निकलते ही ये अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर चले जाएंगे। हाल में ही जारी तबादला सूची में श्रीमन् को आयुक्त आदिवासी विकास से सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी बनाया गया है। स्वतंत्र कुमार गैस राहत संचालक से सचिव मछुआ कल्याण बनाए गए थे। ये दोनों अधिकारी यदि प्रतिनियुक्ति में जाते हैं तो फिर इनके विभाग किसी और को सौंपने पड़ेंगे। इसके अलावा पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव व 2001 बैच के पी. नरहरि भी दिल्ली जाने वाले हैं। मप्र से उन्हें क्लियरेंस मिल गया है। केंद्र में पद निकलते ही जाएंगे।
अभी से हैं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर
सर्कुलर आने के बाद मप्र के कई अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। इनमें 2025 में 2009 बैच के प्रियंका दास, अविनाश लवानिया, प्रीति मैथिल, 2010 बैच के तन्वी सुंद्रियाल, 2012 बैच के नीरज कुमार सिंह, पंकज जैन, प्रवेश सिंह अढायच प्रतिनियुक्ति पर गए। 2024 में 2009 बैच के तरुण पिथोड़े, 2010 बैच के गणेश शंकर मिश्रा व षणमुग्घा प्रिया मिश्रा, 2011 बैच में अनुग्रह पी, 2012 बैच में चंद्रमोहन ठाकुर व बक्की कार्तिकेयन और 2013 बैच में हर्ष दीक्षित प्रतिनियुक्ति पर गए। 2023 में 2007 बैच की स्वाति मीणा नायक, 2008 बैच की जेपी आइरिन सिंथिया व एस विश्वनाथन प्रतिनियुक्ति पर गए। 2022 में 2007 बैच के आईएएस अफसर शशांक मिश्रा, 2008 बैच की छवि भारद्वाज, विकास नरवाल और नंदकुमारम, वर्ष 2009 बैच के तेजस्वी एस नायक, 2011 बैच के विजय कुमार जे व बी विजयदत्ता प्रतिनियुक्ति पर गए। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर इस समय मप्र के कुल 44 आईएएस अधिकारी हैं। इनकी वजह से कामकाज का ढांचा प्रभावित है। हाल में शासन स्तर पर हुए तबादलों में 5-6 सचिव स्तर के अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से विभाग सौंपे गए। इसके बाद भी कई आईएएस अधिकारी ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक विभागों का प्रभार है। इनमें ऋषि गर्ग (एमडी मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, सदस्य सचिव राज्य योजना आयोग और संचालक अटल बिहारी सुशासन संस्थान), विशेष गढ़पाले (एमडी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी, सचिव ऊर्जा व एमडी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी), जान किंग्सली (सचिव उद्यानिकी, सचिव नर्मदा घाटी विकास और संचालक पुनर्वास एनवीडी व सचिव जल संसाधन), शिवशेखर शुक्ला (एसीएस गृह, एसीएस संस्कृति, एसीएस धामिक न्यास व धर्मस्व, आयुक्त स्वराज संस्थान व न्यासी सचिव भारत भवन) समेत अन्य भी शामिल हैं।
आईपीएस अफसरों पर बढ़ा प्रतिनियुक्ति का दबाव
वहीं केंद्र सरकार द्वारा आईपीएस अधिकारियों के एम्पेनलमेंट नियमों में किए गए बदलाव के बाद मप्र कैडर के आईपीएस अफसरों पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का बड़ा दबाव बन गया है। नए नियमानुसार 2011 बैच और उसके बाद के आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में आईजी स्तर पर एम्पेनलमेंट पाने से पहले एसपी या डीआईजी रैंक पर कम से कम दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। इस फैसले को केंद्र की उस नीति की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत करीब चार महीने पहले केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने को लेकर पुलिस मुख्यालय को कहा था। उस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि केंद्र के अधीन विभिन्न विभागों और केंद्रीय पुलिस संगठनों में एसपी और डीआईजी स्तर पर अधिकारियों की कमी है और राज्यों से पर्याप्त संख्या में अफसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
आईपीएस को दो साल का डेप्युटेशन जरूरी
अब नए एम्पेनलमेंट नियम लागू होने के बाद यह पत्र एक तरह से अनिवार्यता में बदल गया है। मप्र कैडर के वे आईपीएस अधिकारी, जिन्होंने अब तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति नहीं ली है, उनके लिए भविष्य में केंद्र में सेवा देना लगभग अनिवार्य सा हो गया है। यदि वे आगे चलकर केंद्र सरकार में आईजी स्तर के लिए एम्पेनल्ड होना चाहते हैं, तो उन्हें तय अवधि तक कम से कम दो साल के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना ही होगा। मप्र कैडर के 2011 बैच के रियाज इकबाल, राहुल लोढ़ा, सिमाला प्रसाद और डॉ. असित यादव तथा 2012 बैच के मयंक अवस्थी, विवेक सिंह, कुमार प्रतीक, शिव दयाल और शैलेन्द्र सिंह चौहान ऐसे अधिकारी हैं, जो अब तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं गए है। ये सभी अफसर अब डीआईजी हो गए हैं, इन अफसरों को अब तीन-चार साल के भीतर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना होगा। नियमानुसार डीआईजी पद पर आईपीएस अफसर को चार साल की सेवाएं देना होती है। ऐसे में वर्ष 2011 के बैच के अफसरों के पास अब तीन साल का समय है, जबकि 2012 बैच के अफसरों के पास चार साल का समय है। इसके बाद के बैच के अफसरों के पास चार साल से ज्यादा का समय है, जिसमें वे केंद्र में जाने का निर्णय ले सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस फैसले का उद्देश्य केंद्रीय पुलिस संगठनों और मंत्रालयों में एसपी और डीआईजी स्तर पर लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरना है। वहीं, राज्य स्तर पर इसका खासा असर नहीं होगा, क्योंकि यहां पर राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस बने अफसरों की संख्या बहुत है।

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