आदरणीय हितानंद जी… संघ से पुन: संघ में?

प्रदीप त्रिपाठी

संघ जब भी कहेगा झोला उठाकर चल देंगे के भाव से काम करने वाले आदरणीय हितानंद जी पुन: संघ में जा रहे है । वे अभी तक भाजपा में थे यह अहसास उन्होंने कभी होने ही नही दिया । ऐसा लगा मानो सिर्फ कार्यालय बदला था पता बदल था शेष तो सब कुछ वही था जैसे वो पहले थे ।
 कोई इच्छा,आकांक्षा,महत्वाकांक्षा कुछ नहीं है. सोने रूपी शुद्ध सात्विक रूप में संघ से भाजपा में आये और स्वयं को तपाकर संघ भाव से अपना श्रेष्ठतम दिया। भाजपा में रहते हुए रीति नीति तो भाजपा की रखी लेकिन व्यक्तिगत जीवन प्रचारक का ही जिया ओर स्वयं को कुंदन रूप ढालकर वापस चल दिये ।
 संघ परंपरा अनुसार जो संघ बतायेगा वहीं जीवन को खपा देने का भाव रखने वाले हितानंद जी के 2020 में भाजपा में आने के बाद, मुझे साथ मे काम करने का अवसर मिला। समर्पण, शुचिता, संयम, सामूहिकता,सहनशीलता, सामंजस्य,अपने पराये से परे जाकर  संगठन हित मे निस्वार्थ भाव से कार्य करते रहने की निरंतरता का जीवंत उदाहरण रहे हितानंद जी भाई सा । एक स्वयंसेवक के रूप में मैने अपने संगठन मंत्री जी से बहुत कुछ सीखा ।
जिस ईश्वरीय कार्य को लेकर सभी  स्वयंसेवक-कार्यकर्ता लगे हुए है भाजपा में संगठन मंत्री रूपी प्रचारकों की श्रंखला कार्य के प्रति हमारी निष्ठा को अक्षुण्ण बनाये रखती है । उसकी सार्थकता का परिणाम है कि कई कार्यकर्ता निजी हित, स्वार्थ, पद, दायित्वों से ऊपर उठकर काम के लिये अपना सर्वस्व लगा देते है । आदरणीय हितानंद जी ने  पूर्ववर्ती संगठन मंत्रीयो की इसी जीवटता को ओर मजबूत और परिणाम सिद्ध किया, 22 वर्षों से भाजपा सरकार मध्यप्रदेश की उत्तरोत्तर प्रगति के लिये कार्यरत है।
मेरे लिये एक सुखद अनुभूति रही कि लगातार पिछले कई चुनावों में सभी मा मुख्यमंत्री,प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री सहित भाजपा नेतृत्व के साथ बहुत ही नजदीकी से ओर लंबे समय तक काम करने का अवसर मिला, ऐसे समय संगठन मंत्री के रूप काम कर रहे प्रचारक कठिनतम निर्णयों में दधीचि समान भूमिका निभाते है कि उनको देखकर संगठन के लिये समर्पित भाव से कार्य करने वाले कार्यकर्ता की लगन कई गुना बढ़ जाती है।
 कई सही निर्णयों, सटीक उत्तर के बाद भी समीक्षा ओर सवाल उठते रहते थे लेकिन हितानंद जी अपने व्यवहार के बल पर सभी को सन्तुष्ट कर ही लेते थे। अनुकूल परिस्थिति, भाग्य और भगवान में भरोसा,काम करते की  सलाह ओर काम देते रहने की उनकी कला हमेशा प्रचारक शैली की रही। भाजपा में रहते हुए भी मुझे उनके साथ रहने में संघ कार्य के समान ही अनुभूति रही। पार्टी के हर कार्यकर्ता के लिये  भरपूर समय ओर स्नेह उनकी प्राथमिकता रही है। हितानंद जी भाई सा भरपूर माथा पच्ची में उलझे होने के बाद भी लघु किस्से,कहानी उदाहरण सुनाते एवं कार्यकर्ताओं के अलावा भी समाज के भिन्न भिन्न लोगो के बारे में,भौगोलिक सामाजिक जानकारी के तो एनसाइक्लोपीडिया हे ही। अब इस बात की कमी जरूर महसूस होगी क्योंकि जबलपुर केंद्र होने से मिलने की आवृत्ति कम हो जायेगी।
वाकई में प्रचारक जीवन माँ भारती की सेवा में लगने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का केंद्र है । प्रचारक वह धुरी है जिन के कार्य करने की शैली ओर नि:स्वार्थ भाव  हम जैसे साधारण कार्यकर्ताओं को लक्ष्य से, पद्धति से भटकने नही देती। कार्य के प्रति समर्पण भाव में निश्चिंतता का अदभुत अनुभव बना रहता है।  मुझे आज पूरा संतोष है कि मैंने भाजपा में संगठन मंत्री (प्रचारक) ओर संघ में प्रचारक रहे वरिष्ठ जनों से बहुत कुछ सीखा ओर सीख रहा हूं आज भी मन मे प्रबल इच्छा रहती है कि भगवान की यह कृपा मुझ पर बनी रहे ताकि में अपने जीवन को सार्थक रख सकूं। पिताजी की सरकारी नौकरी में कई स्थानांतरण (16) के बाद भी अलग अलग स्थानों पर अलग-अलग संगठन में प्रचारक, संगठन मंत्री, साथी स्वयंसेवकों कार्यकर्ताओं से  भरपूर अपनापन मिलता रहा।  सबसे महत्वपूर्ण संघ कार्य की अनुभूति एवं प्रचारकों के रूप में मिले गुरुगणों ने जीवन को शुद्ध, सात्विक,संतुष्ट,संतुलित बना रखा है। 42 साल के मेरे स्वयंसेवक जीवन के अनुभव में संघ कार्य करने की परिस्थितियों में अनुकूलता कई गुना बड़ी इसके बाद भी विभिन्न स्तरो पर काम कर रहे मा.प्रचारक गण की सरलता,सहजता,आत्मीयता, जीवटता ओर अपनत्व वही है। क्षेत्र सह बौद्धिक प्रमुख के रूप में आदरणीय हितानंद जी से हमे बहुत कुछ सीखने,समझने,करने को मिलता रहेगा…
लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं

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