बिच्छू राउंडअप/नृपेंद्र मिश्र बोले- राम मंदिर के संपूर्ण निर्माण में 1900 करोड़ होंगे खर्च

नृपेंद्र मिश्र

नृपेंद्र मिश्र बोले- राम मंदिर के संपूर्ण निर्माण में 1900 करोड़ होंगे खर्च
यूपी के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति की शनिवार को दूसरे दिन की बैठक राम जन्मभूमि परिसर में हुई। बैठक में राम कथा संग्रहालय के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक से पहले मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण पर कुल 1900 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। अब तक जीएसटी सहित 1600 करोड़ का भुगतान हो चुका है। 30 अप्रैल तक राम मंदिर से जुड़े सभी निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। निर्माण पूरा होने के बाद एल एंड टी और टाटा कंसलटेंसी साइट से हटेंगी। 30 अप्रैल तक सभी दस्तावेज और बिल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। एल एंड टी और टाटा कंसलटेंसी ने तीन वर्ष की गारंटी दी है। मेंटेनेंस के लिए दोनों संस्थानों की स्मॉल यूनिट मंदिर परिसर में तैनात रहेगी। ऑडिटोरियम का कार्य अभी शेष है। अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है।  रामलला के अस्थायी मंदिर का स्मारक भवन फरवरी माह में तैयार हो जाएगा। वहीं, राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले हुतात्मा कारसेवकों की स्मृति में बन रहा स्मारक मार्च माह तक पूर्ण होने की उम्मीद है। परकोटे के निकट जूता-चप्पल स्टैंड और लॉकर निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है।

गगनयान कार्यक्रम 2027: मानव मिशन से पहले होंगी तीन मानवरहित उड़ानें  
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया है कि 2027 में निर्धारित महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के तहत पहले मानवरहित मिशन की दिशा में इसरो काम कर रहा है। यह मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जो वर्तमान में विकास के चरण में है। इसका उद्देश्य तीन सदस्यीय दल को तीन दिवसीय अंतरिक्ष मिशन पर भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। नारायणन ने कहा-गगनयान कार्यक्रम 2027 में शुरू करने की योजना है। इससे पहले तीन मानवरहित मिशनों की योजना है। हम पहले मानवरहित मिशन की दिशा में काम कर रहे हैं। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैज्ञानिक इस मिशन की सफलता के लिए कई परीक्षण कर रहे हैं। कई परीक्षण चल रहे हैं। आप जानते हैं कि गगनयात्री की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी। हमें राकेट सहित हर प्रणाली की गुणवत्ता की जांच करनी होगी। हमारा लक्ष्य यही है- गगनयान की सफलता। हमें इसे पूरी तरह सफल बनाना है। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

तेजप्रताप ने खाली किया बंगला, पंख-एसी और बल्ब गायब
बिहार की राजनीति में एक सरकारी आवास को लेकर नया विवाद उभर गया है। मंत्री लखेंद्र पासवान ने पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव द्वारा खाली किए गए सरकारी बंगले की हालत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बंगले की स्थिति बेहद खराब है और कई आवश्यक वस्तुएं गायब हैं। मंत्री लखेंद्र पासवान ने बताया कि जब उन्हें आवंटित बंगले का निरीक्षण कराया गया, तो हालात देखकर वह चौंक गए। उनके अनुसार, बंगले से पंखा, कुर्सी, एसी और बल्ब तक गायब हैं। बंगले की छत भी क्षतिग्रस्त है, जिससे यह फिलहाल रहने योग्य नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक वह इस बंगले में रहना संभव नहीं समझते। यहां एक बल्ब भी नहीं बचा है, पूरा ढांचा जर्जर स्थिति में है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, तेजप्रताप यादव या उनके समर्थकों की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब यह देखना बाकी है कि भवन निर्माण विभाग जांच में क्या निष्कर्ष सामने लाता है और क्या प्रशासनिक कार्रवाई होती है।

मरीजों के लिए खुशखबरी: दिल्ली एम्स की खोज…स्ट्रोक सस्ता इलाज ‘सनलाइट थेरपी’
भारत में आज स्ट्रोक एक गंभीर और तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्ट्रेस, गलत खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण स्ट्रोक के केस हर साल लगातार बढ़ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि हर साल लाखों भारतीय स्ट्रोक का शिकार होते हैं, जिनमें से कई लोगों की जान चली जाती है। इससे साफ है कि यह बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में दिल्ली एम्स की एक नई स्टडी स्ट्रोक के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। शोध के अनुसार, रोजाना सिर्फ 30 मिनट धूप में समय बिताना स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों की रिकवरी, नींद और मूड में सुधार कर सकता है। वो भी बिना किसी अधिक खर्च के। एम्स की यह स्टडी नवंबर 2023 से अप्रैल 2025 के बीच की गई और इसे संस्थान के पांचवें रिसर्च डे पर पेश किया गया। इसमें पाया गया कि जिन स्ट्रोक मरीजों को नियमित इलाज और फिजियोथेरेपी के साथ सनलाइट थेरेपी दी गई, उनकी जिंदगी की गुणवत्ता उन मरीजों की तुलना में काफी बेहतर रही जिन्हें केवल सामान्य इलाज दिया गया।

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