- मप्र भाजपा में बड़ा बदलाव: संघ में लौटे हितानंद
- गौरव चौहान

भोपाल। मप्र भाजपा में संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया है। हितानंद शर्मा की आरएसएस में वापसी हो गई है। हितानंद शर्मा संघ के क्षेत्रीय सह बौद्धिक प्रमुख बनाये गए हैं। अब तक वे भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हितानंद शर्मा वर्तमान में मप्र भाजपा के संगठन महामंत्री थे। हितानंद शर्मा के संघ में वापसी करने के बाद अब मप्र भाजपा में संगठन महामंत्री का पद खाली हो गया है। ऐसे में पार्टी के अगले संगठन महामंत्री के नाम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि भाजपा की तरफ से अभी तक किसी के भी नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्र बताते है कि भाजपा में संगठन स्तर के इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी अब मप्र के बाहर के किसी व्यक्ति को सौंपी जा सकती है।
हितानंद शर्मा 5 साल से इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसके पहले वे सह संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। साल 2020 में उन्हें प्रदेश सह-संगठन महामंत्री बनाया गया था, जबकि 2022 में वे सुहास भगत जगह पर प्रदेश संगठन महामंत्री बनाए गए। हितानंद शर्मा की आरएसएस में जड़ें काफी मजबूत हैं। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल अंचल में भी उनकी गहरी पकड़ है। उन्हें अच्छे कैडर मैनेजमेंट के लिए जाना जाता है। अब जबलपुर उनका केन्द्र यानी मुख्यालय होगा, जहां से वे एमपी और छत्तीसगढ़ में संघ की नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हितानंद के साथ आरएसएस के तीन अन्य प्रचारकों की भूमिका बदली गई है। सुरेंद्र मिश्रा अब पूर्व सैनिक सेवा परिषद में काम करेंगे। मुकेश त्यागी ग्राहक पंचायत में काम संभालेंगे। वहीं ब्रजकिशोर भार्गव क्षेत्र गो सेवा प्रमुख बनाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक रणनीति के तहत यह बदलाव किया गया है। हितानंद शर्मा मूल रूप से अशोकनगर (चंबल क्षेत्र) के निवासी हैं। वे लंबे समय से विद्या भारती संगठन से जुड़े रहे हैं। संघ पृष्ठभूमि के चलते संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। हितानंद शर्मा की नई जिम्मेदारी तय होने के बाद नया प्रदेश संगठन महामंत्री को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कैडर मैनेजमेंट में माहिर
मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री बनने से पहले वे सह संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2020 में उन्हें प्रदेश सह-संगठन महामंत्री बनाया था, जबकि 2022 में वे सुहास भगत के स्थान पर प्रदेश संगठन महामंत्री बने थे। आरएसएस में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है, खासकर ग्वालियर-चंबल अंचल में। संगठन के भीतर उन्हें अनुशासन और कैडर मैनेजमेंट के लिए जाना जाता है। हितानंद शर्मा के संगठन महामंत्री रहते संगठन से लेकर चुनावी रणनीति में बड़ी कामयाबियां मिली हैं। बूथ सशक्तिकरण अभियान में उन्होंने माइक्रो-लेवल पर जाकर तैयारियां कीं। तकनीकी नवाचारों को जिस तरह अपनाया गया, वह भाजपा में पहला प्रयोग माना गया। भाजपा में निरंतर चलने वाले अभियानों की संपूर्ण जानकारी उनके मोबाइल और तकनीकी सिस्टम में उपस्थित रहती थी। विधानसभा चुनाव में ताबड़तोड़ जीत और लोकसभा चुनाव में 100 प्रतिशत यानी 29 सीटों पर विजय के पीछे हितानंद शर्मा की पर्दे के पीछे रहकर चुनावी तैयारी का बड़ा योगदान था। हितानंद शर्मा तत्कालीन संगठन महामंत्री सुहास भगत के सह संगठन महामंत्री के रूप में भाजपा में आए थे। पार्टी से पहले उन्होंने लगभग 10 वर्षों तक विद्या भारती का काम देखा। उससे भी पहले वे तहसील प्रचारक, जिला प्रचारक और विभाग प्रचारक जैसे दायित्व निभा चुके हैं।
