
- बिना कारण बताए सेवाएं समाप्त करने से मचा हड़कंप
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
इंदौर और भोपाल में बड़े जोश के साथ शुरू की गई मेट्रो ट्रेन सेवा अभी तक फ्लाप साबित हुई है। ऐसे में एमपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में छंटनी का दौर शुरू हो चुका है और इसके पीछे के कारणों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब तक 9 कर्मचारियों को हटाया जा चुका है। जिनमें डीएमआरसी से प्रतिनियुक्ति पर आए 6 अधिकारी और 3 लोग ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस से जुड़े हैं। वहीं, भोपाल मेट्रो में हाल ही में पर्यवेक्षण (सुपरविजन) से जुड़े 6 स्टाफ को हटाने के नोटिस दिए जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक यह छंटनी ऑपरेशन, मेंटेनेंस और डिजाइन सेक्शन से की गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, उनके सेवा समाप्ति पत्रों में किसी भी प्रकार का कारण दर्ज नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों के बीच असमंजस और डर का माहौल बन गया है। एमपी मेट्रो रेल कॉरर्पोरेशन में कुल 400 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से इन हाउस 250 अधिकारी-कर्मचारी हैं। 150 कर्मचारी आउट सोर्स के जरिए रखे गए हैं।
गौरतलब है कि नगरीय विकास योजनाओं में वित्तीय संकट से जूझ रहा नगरीय विकास एवं आवास विभाग अब अपने उपक्रमों में छंटनी पर काम कर रहा है। स्मार्ट सिटी, एमपी अर्बन डेवलपमेंट कंपनी और मेट्रो कॉरपोरेशन से हाल ही में लगभग 50 से अधिक अधिकारी -कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई है। इनमें संविदा, प्रतिनियुक्ति और दैनिक वेतन भोगी जैसे कर्मचारी शामिल हैं। कुछ महीने पहले विभाग हाजिरी में फेस रिकग्निशन लागू करके नगरीय निकायों में काम नहीं कर रहे लगभग 5 हजार गायब कर्मचारियों की पहचान कर कार्रवाई कर चुका है। बीते कुछ हफ्तों में शहरी विकास से जुड़े उपक्रमों जैसे एमपी अर्बन डेवलपमेंट कंपनी, मेट्रो कारपोरेशन और स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन से 50 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी हटाए जा चुके हैं। वहीं, एमपीयूडीसी में नर्मदापुरम, चंबल और छिंदवाड़ा यूनिट को बंद करके दो कम्युनिटी डेवलपमेंट अफसर (सीडीओ) को हटाया जा चुका है।
खुलने लगी फर्जी नियुक्ति की परतें
मेट्रो प्रबंधन इसे खर्च कम करने की सर्जरी बता रहा है, लेकिन अंदर चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है । सूत्रों का दावा है कि एमपी मेट्रो में नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां हुई हैं। इन्हीं नियुक्तियों की परतें खुलने के बाद माहौल गरमाया हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिन कर्मचारियों पर फर्जी नियुक्ति का आरोप है, उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मेट्रो प्रबंधन ने एक-डेढ़ दर्जन और कर्मचारियों को हटाने की सूची तैयार कर रखी है। वहीं हाल ही में हटाए गए एक कर्मचारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसका जवाब मेट्रो प्रबंधन के विधि विभाग को देना है। इसके चलते जिन अधिकारियों की नियुक्तियों और निर्णयों पर सवाल हैं, उन पर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि एक सीनियर अधिकारी को हटाया गया है, जिनका नाम कुछ समय पहले हटाए गए एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी से जोड़ा जा रहा है । चर्चा है कि इसी अधिकारी के कार्यकाल में गलत तरीके से कई भर्तियां की गई थीं और कुछ आर्थिक गड़बडिय़ां भी सामने आई थीं। हालांकि, मेट्रो प्रबंधन के आला अधिकारी पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
स्मार्ट सिटी से हटाए गए 29
स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में भी जबलपुर से 18, सागर से 7 और भोपाल में 4 अधिकारी-कर्मचारी हटाए जा चुके हैं। भोपाल से हटे लोगों में एक कंपनी सेक्रेटरी, एक सब इंजीनियर और 2 दैवेभो हटाए जा चुके हैं। कॉर्पोरेशन में संविदा, प्रतिनियुक्ति, आउटसोर्स और दैवेभो श्रेणी में लगभग 5 हजार स्टाफ है। केंद्र ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए काम पूरा करने की अंतिम डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च 2025 कर दी थी। इसके बाद कोई अतिरिक्त केंद्रीय सहायता नहीं मिलेगी। वहीं, एमपीयूडीसी में ज्यादातर काम अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों (जैसे एडीबी) से मिली केंद्रीय सहायता से होते हैं। एसीएस नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे का कहना है कि शहरी विकास से जुड़े उपक्रमों में जो प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, उनसे जुड़े गैर-जरूरी स्टाफ को हटाया जा रहा है। प्रदेश सरकार बिना काम के किसी को वेतन नहीं दे सकती। नगरीय निकायों में भी फेस रिकग्निशन लागू कर 5 हजार कर्मियों पर कार्रवाई कर चुके हैं।
