बिच्छू राउंडअप/किरेन रिजिजू, बोले- देश शर्मिंदा, महापुरुषों का अपमान अस्वीकार्य

किरेन रिजिजू

किरेन रिजिजू, बोले- देश शर्मिंदा, महापुरुषों का अपमान अस्वीकार्य
संसद के संयुक्त सत्र में बुधवार को विपक्ष के हंगामे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाओं और महापुरुषों की जयंती पर विपक्ष के विरोध ने सांसद और जनता दोनों को चौंका दिया। ऐसे में अब संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही विपक्ष के व्यवहार की कड़े शब्दों में आलोचना भी की है। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के कारण देश शर्मिंदगी महसूस कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोनों सदनों को संबोधित कर रही थीं, तब विपक्ष ने जो व्यवहार किया, उससे देश शर्मिंदा हुआ। देश कांग्रेस और उसके सहयोगियों को कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर हंगामा किया। रिजिजू ने आगे बताया कि संसद में जब ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने का जिक्र हुआ और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि दी जा रही थी, तब विपक्ष ने हंगामा किया। जब गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहादत दिवस का जिक्र हुआ, विपक्ष ने हंगामा किया। रिजिजू ने आगे कहा कि जब बाबा साहेब आंबेडकर की 150वीं जयंती पर भी हंगामा हुआ।

आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं, यह एक तरह का धोखा है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा के एक परिवार के इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्होंने अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ लेने के लिए परीक्षाओं से ठीक पहले बौद्ध धर्म अपना लिया था और हरियाणा सरकार से अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस कोशिश की कड़ी आलोचना की और परिवार की मंशा पर संदेह जताया। सीजेआई ने इसे एक नए तरीके का फ्रॉड बताया। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला हरियाणा के हिसार के एक जाट परिवार के कृष्ण पुनिया के बच्चों नितिन पूनिया और एकता पूनिया द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जो जन्म से सामान्य श्रेणी में आते हैं। उनकी याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज, सुभारती यूनिवर्सिटी में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत एडमिशन के लिए चुना गया था, लेकिन वे नीट-पीजी कोर्स में सफलतापूर्वक दाखिला नहीं ले पाए। याचिकाकर्ताओं ने हिसार के सब-डिविजनल ऑफिसर (सिविल) द्वारा जारी बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किए थे, जिससे उन्हें कॉलेज में एडमिशन मिल गया।

भाजपा में रार: वापस लो यूजीसी के असंवैधानिक नियम: कलराज मिश्र
यूजीसी के नए नियमों को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी रार दिखने लगी है। ताजा बयान पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का आया है जिन्होंने नए नियमों को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। कलराज मिश्र ने कहा है कि यह पूर्णत: असंवैधानिक है। इसको वापस लेना चाहिए।  एससी-एसटी के भेदभाव पर वे शिकायत कर सकते थे, करते थे, 2012 के अंतर्गत जो गाइडलाइन थी उसमें यह था, अब इसमें ओबीसी को भी जोड़ा गया है। हमारा कहना है कि इसमें अलग-अलग जाति के आधार की बजाए सभी लोगों को अधिकार देना चाहिए कि जिसके खिलाफ भी भेदभाव हो रहा है वो शिकायत कर सके। दूसरे इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी दंड का प्रावधान होना चाहिए जो अभी नहीं है। बता दें यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ इस समय सोशल मीडिया पर तूफान मचा हुआ है और देश की सियायत भी गरमा रही है।  

इजराइली पीएम के फोन कैमरे पर लगा टेप, फोटो वायरल
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वह स्मार्टफोन पर बात करते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस तस्वीर में सबसे ज्यादा ध्यान उनके फोन के पीछे लगे कैमरे पर गया, जिस पर टेप या स्टिकर लगा हुआ दिखाई दे रहा है। तस्वीर में नेतन्याहू काले रंग की जैकेट और सफेद शर्ट पहने हुए एक गहरे रंग की कार के पास खड़े होकर फोन पर बात कर रहे हैं। जैसे ही यह तस्वीर सामने आई, सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके फोन के कैमरे को कवर किए जाने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। बिजनेस इंफ्लुएंसर और पॉडकास्ट होस्ट मारियो नॉफल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि नेतन्याहू ने अपने फोन कैमरे पर टेप क्यों लगाया है? इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि नेतन्याहू किस तरह का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं और कैमरे को ढकने के पीछे क्या वजह हो सकती है।

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