
- हर साल 7500 आरक्षकों की भर्ती करने का सरकार ने तय किया लक्ष्य
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में जिस तेजी से आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से पुलिस बल की कमी है। इस कमी की भरपाई करने की मांग लगतार उठ रही है। वहीं दूसरी तरफ स्थिति यह है कि वर्तमान में तय अमले में भी पुलिस आरक्षकों के 25 हजार पद खाली पड़े हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि हर साल 7500 आरक्षकों की भर्ती की जाएगी। इस मान से सरकार के इस बार के बचे 3 साल में 22,500 पद ही भर पाएंगे। ऐसे में 3 साल में आरक्षकों के खाली पदों को भरना आसान नहीं है।
बता दें, प्रदेश में पुलिस का स्वीकृत बल एक लाख 26 हजार है। नया थाना खुलने पर ही बल बढ़ता है। रिक्त पदों को भरने में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में एक समय में 7500 से अधिक पुलिस आरक्षकों को प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता। आरक्षकों का बुनियादी प्रशिक्षण नौ माह चलता है। यानी, प्रति वर्ष लगभग 7500 आरक्षकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे अधिक आरक्षकों की भर्ती के पहले प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता बढ़ानी होगी। हालांकि जबलपुर में पुलिस प्रशिक्षण स्कूल खोलने का प्रस्ताव है। उधर, पुलिसकर्मियों की कमी के कारण, अपराधों की विवेचना और गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं कोर्ट में चालान प्रस्तुत करने में देरी हो रही है। लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत पंजीबद्ध होने के बाद अपराध दर्ज होने में डेढ़ से दो साल लग रहे हैं। इसी तरह अपराध पंजीबद्ध होने के बाद अभियोजन में भी अधिकतर मामलों में औसतन दो वर्ष लग रहे हैं।
सरकार की राह में कई बाधाएं
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने घोषणा की है कि तीन वर्ष तक हर साल 7,500 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिससे रिक्त पदों की पूर्ति की जा सके। इनमें पहला बैच इसी वर्ष अप्रैल-मई तक मिल जाएगा। सच्चाई यह है कि रिक्त पदों को भरने में कम से कम पांच वर्ष लग जाएंगे। कारण, भर्ती के बाद भी पुलिस बल की संख्या प्रति वर्ष तीन से चार हजार ही बढ़ पा रही है। इसका कारण यह कि ओबीसी आरक्षण के चलते 13 प्रतिशत पद होल्ड किए जाने के बाद 6,525 पदों के विरुद्ध ही अंतिम परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा। इसमें लगभग एक हजार ऐसे होते हैं जो दूसरे राज्यों में या केंद्र में अच्छी नौकरी मिलने पर ज्वाइन नहीं करते हैं। उधर, 62 वर्ष की सेवा पूरी कर लगभग डेढ़ हजार पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में हर साल लगभग चार हजार बल ही बढ़ रहा है। उधर, जनसंख्या और अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
मप्र में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा
मप्र में पुलिस का अमला पर्याप्त नहीं होने के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। अन्य राज्यों से तुलना करें तो मध्य प्रदेश गंभीर अपराधों की सर्वाधिक संख्या के मामले में पहले से पांचवें नंबर के बीच में है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के विरुद्ध सबसे अधिक अपराध (22,323 मामले) मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए। महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले में राज्य देश में पांचवें नंबर पर है। साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025 में 600 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी हो गई। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें पांच लाख से ऊपर रहीं। इसके बाद भी स्थिति यह है कि प्रदेश भर में साइबर का कुल पुलिस बल 300 भी नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में एक झटके में 60 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती की। 32 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष अपराध पांच लाख के करीब होने के बाद भी एक लाख पुलिसकर्मी ही हैं। इनमें भी लगभग 10 प्रतिशत अवकाश पर रहते हैं।
बजट में होगी 50 हजार खाली पदों पर भर्ती की घोषणा
प्रदेश का बजट 18 फरवरी को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा प्रस्तुत करेंगे। इसमें 50 हजार रिक्त पदों पर भर्ती के साथ कर्मचारी हितैषी घोषणाएं होंगी। संविदा कर्मचारियों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के स्थान पर महंगाई भत्ता देने, कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा, महंगाई भत्ते में वृद्धि के साथ एक अप्रैल से नए पेंशन नियम लागू करने की घोषणा की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, बजट में सभी वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए जाएंगे। किसानों के लिए उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सोयाबीन के बाद सरसों सहित अन्य फसलों में भावांतर देने की घोषणा की जा सकती है। वहीं, छोटे-छोटे उद्योग लगाने पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। युवाओं के लिए 50 हजार रिक्त सरकारी पदों पर भर्ती का कार्यक्रम दिया जा सकता है तो कर्मचारियों के हित में भी कदम उठाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, महंगाई भत्ते में वृद्धि, 50 वर्ष बाद पेंशन नियम में परिवर्तन कर एक अप्रैल से लागू करने की घोषणा की जा सकती है। इसे लेकर संबंधित विभागों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उधर, डेढ़ लाख संविदा कर्मचारियों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के स्थान पर अन्य कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता देने का निर्णय भी लिया जा सकता है। इसे लेकर कवायद चल रही है।
