ओलावृष्टि से गेहूं, चना, मसूर सरसों को नुकसान, होगा क्षति का आकलन

ओलावृष्टि
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिला प्रशासन को दिए सर्वे करने के निर्देश

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्से में तेज हवा के साथ वर्षा और ओलावृष्टि से गेहूं, चना, मसूर और सरसों कर फसल को नुकसान हुआ है। फसल खेत में ही आड़ी हो गईं। इससे उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को हुए नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बुधवार को सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि सर्वे कराकर क्षति का आकलन कराया जाए। सरकार संकट की घड़ी में किसानों के साथ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा कि वर्षा-ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई है। ऐसे में प्रभावित जिलों में तुरंत सर्वे कराया जाए। नुकसान के आकलन के आधार पर किसानों को त्वरित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। फसल बीमा दावों के भुगतान में तेजी लाने की भी मांग भी की है। उधर, कृषि विभाग ने जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों की फसल प्रभावित हुई हैं, उनसे 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनियों में क्लेम कराया जाए। सरकार अपनी ओर से राजस्व परिपत्र पुस्तक में जो प्रविधान हैं, वह सहायता तो देगी ही, बीमा के लिए प्रक्रिया की जाए।
ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई गेहूं की फसल
सीहोर जिले की पीलखेड़ी पंचायत हो या फिर शाजापुर जिले का कालापीपल क्षेत्र, ओलावृष्टि और तेज हवा के साथ वर्षा से खेत में फसल आड़ी हो गई। एमएस मेवाड़ा का कहना है कि पीलूखेड़ी में हनुमत सिंह मेवाडा के आठ एकड़ खेत में गेहूं की फसल के ऊपर ओले बिछ गए। अब कुछ नहीं हो सकता है। उत्पादन तो प्रभावित होगा ही गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
140 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई रबी फसलों की बोवनी
प्रदेश में इस वर्ष 140 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बोवनी की गई। इसमें सर्वाधिक क्षेत्र गेहूं 98 लाख हेक्टेयर के आसपास रहा। चना 17.28 लाख, मसूर 6.35 और मटर की बोवनी 3.30 लाख हेक्टेयर में की गई। तिलहनी फसलों में सरसों की बोवनी 41 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11.79 लाख हेक्टेयर में हुई। हालांकि, लक्ष्य 12.22 लाख हेक्टेयर का रखा गया था।

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