बिच्छू डॉट कॉम:टोटल रिकॉल/खाद्य भवन… पोस्टकार्ड अभियान 2 से

खाद्य भवन… पोस्टकार्ड अभियान 2 से
64 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित खाद्य भवन को लेकर नाप तौल अधिकारी-कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। मध्य प्रदेश नाप तौल अधिकारी कर्मचारी संघर्ष समिति ने इस प्रस्ताव को रद्द करने की मांग करते हुए प्रदेश-व्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी ने बताया कि 2 फरवरी से प्रदेशभर के नाप तौल अधिकारी-कर्मचारी दो पोस्टकार्ड भेजेंगे। इनमें एक मुख्य सचिव और दूसरा अपर मुख्य सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को भेजा जाएगा। तिवारी ने बताया कि खाद्य भवन परिसर में लगे बड़े-बड़े पेड़ों की हरियाली बचाने के लिए 22 जनवरी से कर्मचारी चिपको आंदोलन कर रहे है और काली पट्टी लगाकर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक ही कार्यालय के लिए 64 करोड़ रुपए खर्च करना अनुचित है।
साल 2030 तक मप्र को मिलने लगेगी 4 हजार मेगावाट बिजली
मध्य प्रदेश में साल 2030 तक 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को टोरेंट, अडाणी और हिंदुस्तान थर्मल समूहों से 60 हजार करोड़ के अनुबंध किए हैं। परियोजनाओं से 8 हजार लोगों को नौकरियां भी मिलेंगी। ये सभी यह नए पॉवर हाउस अनूपपुर जिले में स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक विशेष गढ़पाले और टोरेंट पॉवर लिमिटेड के जिगिश मेहता, अदानी पॉवर लिमिटेड के एसबी खिलया और हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स के रतुल पुरी के बीच पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि बिजली उत्पादन में जमीन-जल- पर्यावरण-कोयला-रेलवे लाइन आदि का बेहतर समन्वय आवश्यक है। इन सब मानकों पर ऊर्जा उत्पादन के लिए मप्र एक उपयुक्त राज्य है।
22 विभागों को केंद्र से नहीं मिला एक भी रुपया
मप्र को चालू वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार से कुल 44,355.83 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन वित्तीय वर्ष के 10 माह बीत जाने के बाद भी सिर्फ 9,753.05 करोड़ रुपए ही राज्य को प्राप्त हुए हैं। यानी अब तक केवल 22 फीसदी राशि ही दिल्ली से भोपाल पहुंच पाई है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 22 विभागों को 1 अप्रैल से 20 जनवरी के बीच केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है। परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी योजनाओं के लिए भी एक रुपया नहीं मिला, जिससे किसानों से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसी प्रकार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को जल जीवन मिशन के तहत 8,561.22 केसेड मिलने थे, लेकिन 10 महीने में एक भी रुपया जारी नहीं हुआ। ऊर्जा विभाग की आरडीएसएस योजना के तहत 1,736.33 करोड़ मिलने थे, लेकिन पूरी राशि लंबित है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मप्र की जनता भाजपा की डबल इंजन सरकार से डबल मुसीबत में फंस गई है। एक तरफ राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार प्रदेश को उसके हिस्से का पैसा नहीं दे रही।
हबीबगंज क्लस्टर में 200 करोड़ निवेश की संभावना
भेल भोपाल ने दावा किया है कि हबीबगंज क्षेत्र में सालों पहले बने एमएसमई क्लस्टर से 180 करोड़ निर्यात के साथ-साथ 350 करोड़ टर्नओवर पहुंच चुका है। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का दावा है कि इस क्षेत्र में भविष्य में 200 करोड़ और निवेश आ सकता है। हालांकि, ये क्लस्टर न तो राय न ही केंद्र की एमएसएमई क्लस्टर लिस्ट में शामिल है। भेल भोपाल द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सालों से आईएसबीटी क्षेत्र में स्थापित इस क्लस्टर में 14 एमएसएमई इकाइयां मौजूद हैं और 5 हजार से अधिक परिवारों के लिए रोजगार भी मिल रहा है। प्रेसिजन मैन्युफैक्चरिंग, फैब्रिकेशन, कंपोनेंट प्रोडक्शन और इंजीनियरिंग सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में काम हो रहा है। ये उत्पादन से देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों-पावर जेनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, रक्षा उपकरण और हेवी इंजीनियरिंग एप्लिकेशन्स को मदद कर रहे हैं।

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