
- एमपी में हुई सबसे ज्यादा कार्रवाई, अस्पतालों से वसूले 2.15 करोड़ रुपए
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। आयुष्मान योजना में इलाज के साथ ही फर्जीवाड़ा भी बड़े पैमाने पर सामने आ रहा है। हाल यह है कि अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती दिखाकर करोड़ों के क्लेम फाइल कर दिए। ऐसे लोगों के कार्ड एक्टिव रखे गए जो अस्पताल तक नहीं पहुंचे और कुछ अस्पताल बंद रहने के बावजूद इलाज का बिल बनाते रहे। स्थिति यह है कि दक्ष आयुष्मान फेमवर्क के तहत अब तक मध्यप्रदेश में 104 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। करीब 40 हजार कार्ड डिसेबल कर क्लेम रिजेक्ट तक कर दिए गए। वहीं, फर्जी बिल लेने वाले अस्पतालों से उलटा 2.15 करोड़ रुपए की वसूली तक की गई है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश को एंटी-फ्रॉड एक्शन कैटेगरी में देश के सर्वश्रेष्ठ राज्य का दर्जा मिला हुआ है। इस सम्मान का आधार बना दक्ष आयुष्मान फ्रेमवर्क, जिसके जरिए आयुष्मान योजना में फ्रॉड दुरुपयोग और गलत बिलिंग पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की गई है। यह फ्रे मवर्क प्रिवेंशन, रोकथाम, डिटेक्शन, पहचान और डिटरेंस, कड़ी कार्रवाई तीन बेसिक पिलर्स पर बनाया है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता और सुशासन की यह जीत है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ योग्य नागरिकों तक ही पहुंचे।
ऑडिट में अस्पतालों में कई खामियां मिलीं
वैधानिक दस्तावेजों की कमी, इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें, ऑपरेशनल खामियां, क्लिनिकल अप्रॉप्रियेटनेस, कुछ अस्पताल पूरी तरह बंद थे, लेकिन पोर्टल पर एक्टिव रहते हुए क्लेम कर रहे थे।, कई जगह डॉक्टर कागजों पर थे, लेकिन अस्पताल में मौजूद नहीं थे। इन्हें ‘घोस्ट डॉक्टर’ कहा गया।
एआई डेटा एनालिसिस से पकड़ा जा रहा फर्जीवाड़ा
इसे राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने इस फ्रेमवर्क को लागू किया। इसके लिए डिजिटल ऑडिट, कार्ड वैरिफिकेशन, प्री-ऑथराइजेशन चेक और एआई आधारित डेटा एनालिसिस को एक साथ जोड़ा था। अब तक 7,883 क्लेम फर्जी या संदिग्ध पाए गए, जिन्हें रिजेक्ट किया है। इन क्लेम की राशि 24.84 करोड़ थी। इसी तरह फर्जी 40,460 आयुष्मान कार्ड ऑडिट में डिसेबल कर दिए गए। खामियों वाले 47 अस्पतालों को शोकॉज नोटिस, 3 अस्पताल डि-एम्पेनल और 54 स्पेशियलिटी सस्पेंड कर दिए गए। आयुष्मान कार्यालय से मिले आंकडों के अनुसार, 2025-26 में 2.15 करोड़ रुपए की रिकवरी भी अस्पतालों से की गई है।
टेक्नोलॉजी और ग्राउंड एक्शन को साथ जोड़ा
एआई आधारित डाटा एनालिसिस, डेस्क-ऑडिट, फील्ड इंस्पेक्शन मरीज शिकायतों का ट्रैकिंग, सीएम हेल्पलाइन और सीपीजीआरएएमएस से डेटा क्रॉस चेक, ऑडिट में अस्पतालों में कई खामियां मिलीं हैं। जिनमें वैधानिक दस्तावेजों की कमी, इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें ऑपरेशनल खामियां, क्लिनिकल अप्रॉप्रियेटनेस, कुछ अस्पताल पूरी तरह बंद थे, लेकिन पोर्टल पर एक्टिव रहते हुए क्लेम कर रहे थे। कई जगह डॉक्टर कागजों पर थे, लेकिन अस्पताल में मौजूद नहीं थे। इन्हें घोस्ट डॉक्टर कहा गया।
