विधानसभा में पेश होगा डिजिटल बजट

  • ई ऑफिस , ई कैबिनेट के बाद अब ई विधान की तैयारी

गौरव चौहान
 मप्र में ई ऑफिस, ई कैबिनेट के बाद अब ई विधान की व्यवस्था शुरू होने जा रही है। विधानसभा के बजट सत्र में डिजिटल व्यवस्था देखने को मिलेगी। विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे, उनके प्रश्नों के उत्तर भी डिजिटल ही प्राप्त होंगे। मप्र का बजट भी उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा टैबलेट पर ही पड़ेंगे। ई-विधान परियोजना और पेपरलेस बजट को देखते हुए विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे। इस पर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। इस दिशा में बजट सत्र से पहले नेशनल ई-विधान परियोजना लागू की जाएगी। इसके लिए 23 दिसंबर को मंत्री व विधायकों को विधानसभा के मानसरोवर सभागार में प्रशिक्षण दिया गया है।
मप्र विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा। इस सत्र से विधानसभा की कार्यवाही पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की जाएगी। इसके लिए मप्र विधानसभा सचिवालय ने सभी आवश्यक तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। बजट सत्र से पहले सदन के भीतर विधायकों की सीटों पर टैबलेट लगाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से प्रश्न, उत्तर, विधेयक, ध्यानाकर्षण सूचना, शून्यकाल की सूचनाएं और अन्य विधायी दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। भारत सरकार की ओर से ई-विधान परियोजना को देशभर में बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के तहत मप्र विधानसभा को भी डिजिटल और पेपरलेस बनाया जा रहा है। नेशनल ई-विधान परियोजना (नेवा) भारत सरकार की एक ई-गवर्नेंस पहल है, जिसका लक्ष्य देश की सभी विधानसभाओं को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाना है, ताकि विधायी कार्य  एक साझा डिजिटल प्लेटफार्म पर हों, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़े। इसे एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन के सिद्धांत पर बनाया गया है और यह डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय को नोडल विभाग बनाया गया है।
इस बार बजट की किताबें नहीं छपेंगी
गौरतलब है कि पहले प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुआ। फिर ई-कैबिनेट बैठकों की प्रक्रिया शुरू की गईं। अब ई-गवर्नेस की दिशा में मप्र सरकार एक और पहल कर रही है। सरकार ने विधानसभा में डिजिटल यानी पेपरलेस बजट पेश करने की तैयारी कर ली है। यह सरकार का पहला पूर्ण डिजिटल बजट होगा। इस साल बजट की किताबें नहीं छापी जाएंगी। विधायकों को बजट की पूरी जानकारी टैबलेट में दी जाएगी। वित्त विभाग की वेबसाइट पर भी बजट अपलोड होगा। साथ ही पेनड्राइव में बजट की सॉफ्ट कॉपी दी जाएगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा विधानसभा में टैबलेट के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करेंगे। वित्त विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है।  दरअसल, वित्त विभाग पिछले चार साल से बजट पेश करने की कवायद में जुटा है, लेकिन हर साल ऐन मौके पर पूर्व की तरह मैनुअल बजट पेश करने का निर्णय ले लिया जाता है।
25 लाख रुपए की होगी बचत
 वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बजट पुस्तिकाओं की छपाई पर हर साल करीब 25 लाख रुपए खर्च होते हैं, बड़ी मात्रा में कागज की बर्बादी होती है और बजट पुस्तिकाओं को लाने ले जाने में बड़ी संख्या में मैनपॉवर लगता है। फिजूलखर्ची और कागज की बर्बादी रोकने के लिए वित्त विभाग ने इस बार डिजिटल बजट पेश करने को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया है। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी का कहना है कि इस बार विधानसभा में पेपरलेस बजट पेश करने की तैयारी है। बजट पुस्तिकाएं नहीं छापी जाएंगी। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियां तेज कर दी है। गत 19 जनवरी से बजट को लेकर सचिव स्तर की अंतिम दौर की चर्चा शुरू हो गई है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार विभागवार बजट चर्चा हो रही है। शेष 31 विभागों की बजट चर्चा 29 तक चलेगी। इसमें विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी बजट पर चर्चा कर हैं। गत दिसंबर में 22 विभागों की सचिव स्तर की बजट चर्चा हो चुकी है। रहे
बजट के लिए लोगों से लिए गए सुझाव
वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर आम नगारिकों से सुझाव आमंत्रित किए थे। लोगों से कहा गया था कि वे विकसित मप्र के लिए कैसा बजट चाहते हैं, इस बारे में अपना सुझाव दें। सुझाव पोर्टल, टोल फ्री नंबर, ईमेल और डाक के माध्यम से मंगाए गए थे। खास बात यह है कि इस बार बजट को लेकर वित्त विभाग को सुझाव देने में आम नागरिकों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है। इस बार बजट संबंधी करीब एक हजार सुझाव वित्त विभाग को मिले हैं, जबकि पिछली बार लोगों ने दो हजार से ज्यादा सुझाव दिए थे। वित्त विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार को सबसे ज्यादा सुझाव कर्मचारी वर्ग ने दिए हैं। कर्मचारियों ने केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने, आठवां वेतनमान लागू करने, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने व आउटसोर्स प्रथा बंद करने की घोषणा बजट में करने की मांग की है। इसके अलावा आम नागरिकों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने, महंगाई कम करने के उपाय करने, गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने, सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टचार रोकने के उपाय करने जैसे सुझाव सरकार को दिए हैं।

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