
- भोपाल और इंदौर में तैयार होंगे इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग प्रोजेक्ट
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में अचानक होने वाले ब्लैक आउट पर अब लगाम लगेगी। इसके लिए सरकार तकनीक का सहारा ले रही है। जानकारी के अनुसार इसके लिए भोपाल और इंदौर में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग प्रोजेक्ट तैयार होंगे। इससे प्रदेश के बड़े शहरों में किसी भी आपात स्थिति में बिजली सप्लाई प्रभावित नहीं होगी। खासकर जबलपुर में इस व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। क्योंकि जबलपुर में आर्मी प्रोडक्शन यूनिट्स और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठान मौजूद हैं। पावर ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी के सुनील तिवारी का कहना है कि इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर जारी हो चुका है। तीन से चार महीने में इसका काम पूरा हो जाएगा। प्रोजेक्ट कंप्लीट हो जाने से किसी भी आपात स्थिति में शहर में बिजली सप्लाई की दिक्कत नहीं होगी। भोपाल-इंदौर के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है।
गौरतलब है कि जब भारत ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के खिलाफ रणनीतिक मोर्चे पर सक्रिय था, उसी समय देश के भीतर भी एक अहम सुरक्षा तैयारी पर काम चल रहा था। जबलपुर में आर्मी प्रोडक्शन यूनिट्स और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठान मौजूद हैं। यहां तोपे, गोला-बारूद, बख्तरबंद सैन्य वाहन सहित रक्षा से जुड़ी सामग्री का निर्माण होता है। ऐसे में जबलपुर को किसी भी संभावित बिजली संकट से सुरक्षित रखने की योजना पर सरकार ने तेजी से काम शुरू किया। उद्देश्य साफ है अगर युद्ध या तकनीकी कारणों से देश की बिजली ग्रिड पर हमला हो या वह ठप हो जाए, तब भी जबलपुर अंधेरे में न डूबे। इसके बाद भोपाल और इंदौर में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग प्रोजेक्ट तैयार होंगे। इससे प्रदेश के बड़े शहरों में किसी भी आपात स्थिति में बिजली सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।
इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग परियोजना को मंजूरी
जानकारी के अनुसार, जबलपुर में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग परियोजना मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वीकृत की गई, जो इसकी अहमियत को दर्शाती है। इस योजना के तहत अगर वेस्टर्न ग्रिड या राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क में कोई बड़ी खराबी आती है, तो जबलपुर खुद के स्थानीय बिजली स्रोतों से संचालित हो सकेगा। यानी ग्रिड से अलग होकर शहर की आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बिजली मिलती रहेगी। परियोजना का कार्य फिलहाल प्रगति पर है और इसे अगले तीन से चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद, यदि देश के अन्य शहर अंधेरे का सामना करें, तब भी जबलपुर में बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। इससे रक्षा संस्थान, अस्पताल, ट्रैफिक सिग्नल और अन्य आवश्यक सेवाएं सुरक्षित रहेंगी। जुलाई 2012 में भारत में दो बड़े बिजली संकट आए थे। इस दौरान 30 और 31 जुलाई को देश के कई राज्यों में ब्लैकआउट हुआ था। इस देशव्यापी बिजली सकट से 22 राज्य प्रभावित हुए थे। ग्रिड ओवरलोड की वजह से यह स्थिति बनी थी। इसके बाद से देश के कई शहरों में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग प्रोजेक्ट तैयार हो रहे हैं। इसके तहत जबलपुर के लिए अनुदान की स्वीकृति मिली थी। इसमें 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन कर रही है। इसके बाद से एमपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने इस पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए टेंडर भी जारी हो चुके है। भोपाल और इंदौर के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा। जबलपुर में पहले से ही एक थर्मल पॉवर स्टेशन से ट्रासमिशन लाइन मौजूद है। आपात स्थिति में उस पावर स्टेशन की एक यूनिट को सक्रिय कर शहर को बिजली दी जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 7 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। वहीं भोपाल और इंदौर के मामले में स्थिति अलग है। इन दोनों शहरों में किसी बिजली उत्पादन केंद्र से सीधी ट्रांसमिशन लाइन नहीं है। इसलिए परियोजना स्वीकृत होने के बाद नजदीकी थर्मल पॉवर स्टेशनों से समर्पित ट्रांसमिशन लाइनें बिछानी होंगी। मंजूरी और अनुदान मिलने के बाद इन शहरों में भी इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग लागू की जाएगी। उम्मीद है कि भोपाल और इंदौर के लिए भी जल्द स्वीकृति मिल जाएगी।
