
- पार्वती-कालीसिंध-चंबल प्रोजेक्ट से जुड़ेगी शिप्रा!
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) राष्ट्रीय परियोजना की डीपीआर को सरकार ने रिवाइज किया है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शिप्रा नदी को भी अविरल और निरंतर प्रवाह बनाने के लिए योजना में शामिल करने की मांग प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से किया है। इसके साथ ही 9691.66 करोड़ की 13 सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं को भी समझौते में शामिल करने के लिए जल शक्ति विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय से अनुरोध किया गया है। सिंहस्थ के लिए 29 किलोमीटर लंबे घाट का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लागत 779 करोड़ रुपये है। नौ किलोमीटर लंबे घाटों का 120 करोड़ रुपये की लागत से उन्नयन भी किया जाना है। सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को स्नान के लिए शिप्रा का जल मिले, इसके लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के तहत बांध बनाया जा रहा है। इसमें वर्षा के पानी को इक_ा किया जाएगा और फिर नदी में छोड़ा जाएगा। प्रदेश सरकार ने भारत सरकार से दोनों योजनाओं को पीकेसी परियोजना में शामिल करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश और राजस्थान की पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना में शिप्रा के घाट भी शामिल किए जा सकते हैं। रिवाइज्ड डीपीआर का फायदा भोपाल, इंदौर, उज्जैन विदिशा सहित 16 जिलों को होगा। इन जिलों में सिंचाई, उद्योग और लोगों को पीने का पानी मिलेगा। रिवाइज्ड डीपीआर के बाद परियोजना की लागत 75 हजार से बढकऱ 85 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। इसमें मप्र और राजस्थान सरकार का अंश 10 प्रतिशत और केंद्र सरकार का 90 प्रतिशत होगा। इस परियोजना में दोनों राज्यों के बीच एमओयू हो चुका है। डीपीआर तैयार होने के बाद दोनों राज्यों के बीच में पानी के लेन-देन की शर्तों पर समझौता होगा।
2003 में बनी थी योजना
वर्ष 2003 में मप्र और राजस्थान की नदियों को लेकर एक योजना बनी थी, लेकिन दोनों राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकार होने से प्रस्ताव अटक गया था। राजस्थान सरकार ने चंबल नदी पर बड़ा डैम बना लिया है, जिसको लेकर मध्य प्रदेश सरकार हाईकोर्ट चली गई। पानी वितरण को लेकर सहमति नहीं बनने से मप्र सरकार परियोजना से पीछे हट गई। जनवरी 2024 में दोनों राज्यों के बीच फिर डीपीआर बनाने के संबंध में एमओयू हुआ। नई डीपीआर में तिलावद वृहद परियोजना, पाट वैराज, बिरगोद बैराज, रुदाहेड़ा बैराज, कातना माइक्रो सिंचाई परियोजना, खुमान सिंह शिवाजी परियोजना, नीमच जावद माइक्रो सिंचाई परियोजना, कान्ह डायवर्सन, शिप्रा घाट निर्माण, निवाड़ी मध्य माइक्रो सिंचाई परियोजना, कल्याणपुरा वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, नेवज-एक और नेवज-दो परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं से करीब दो लाख हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 592.62 मिलियन घन मीटर जलभराव होगा।
29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण
मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि शिप्रा भी चंबल की सहायक नदी है, जो मंदसौर जिले में आलोट के पास शिपावरा चंबल में मिलती है। 2028 में सिंहस्थ होना है, जिसमें देश-दुनिया से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण किया जा रहा है। नौ किलोमीटर लंबे घाटों के उन्नयन की भी योजना है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना पर भी काम शुरू कर दिया गया है। इसमें वर्षा के पानी को एकत्र करके शिप्रा में छोड़ा जाएगा। ताकि श्रद्धालु सिंहस्थ में शिप्रा के जल से ही स्नान कर सकें। पीकेसी राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका हिस्सा इन दोनों योजनाओं को बनाया जाता है. तो केंद्र सरकार से बड़ी आर्थिक सहायता मिल जाएगी। परियोजना में 90 प्रतिशत राशि भारत सरकार दे रही है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है।
