- प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
जबलपुर में नालों के गंदे पानी से सब्जी उगाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई। इस दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता उजागर कर दी। रिपोर्ट में सामने आया है कि जबलपुर शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिला हुआ है, जिससे यह पानी अत्यंत दूषित हो चुका है और पीने, निस्तार व सिंचाई के लिए पूरी तरह अनुपयोगी है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तत्काल अमल किया जाए और इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है।
चेतावनी-गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है
प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि नालों का यह दूषित पानी किसी भी स्थिति में वॉटर पाइप लाइन में मिल गया, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि घरों से निकलने वाले सीवेज को सीधे नालों में जाने से तत्काल रोका जाए और नाले के पानी के किसी भी तरह के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए।
नवंबर में नालों से लिए थे सैंपल
प्रदूषण बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला सहित अन्य प्रमुख नालों से पानी के सैंपल लेकर जांच की थी।
