
नई दिल्ली। आज देश 10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस मना रहा है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया और जिन सैनिकों ने युद्ध के मैदान में अपने प्राण गंवाएं, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि देश अपने पूर्व सैनिकों के सम्मान में सिर झुकाता है। राजधानी दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों को देश का गर्व बताया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम भारत समेत विश्व भर में रहने वाले अपने पूर्व सैनिकों को आदरपूर्वक नमन करते हैं। हम शहादत प्राप्त उन सभी सैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। आज मुझे इस विशाल परिवार के साथ में मकर संक्रांति मनाने का अवसर मिला है। राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आपके लिए यह सिर्फ एक पेशा नहीं है; बल्कि एक प्रतिज्ञा है जिसमें आप सभी ने राष्ट्र को अपने से ऊपर रखा है। मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं क्योंकि किसी भी समाज के लिए इससे बड़ा बलिदान कुछ और नहीं होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्री के रूप में उन्हें देश सेवा करने का मौका मिला और यह मेरी सबसे संतोषजनक भूमिका रही है। उन्होंने सभी सैनिकों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना योगदान देते रहते हैं। इसलिए रक्षा मंत्री के रूप में आपके साथ काम करना मेरे जीवन के सबसे सुखद पलों में से एक है। रक्षा मंत्री ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री एवं गृह मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। लेकिन मुझे सबसे अधिक संतोष रक्षा मंत्री के रूप में सेवा करने से ही मिला है। इसमें सैनिकों के जीवन में आने वाली तमाम चुनौतियों का समाधान करने का सौभाग्य मिला है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘सैनिकों को हर परिस्थिति में हमेशा डट कर खड़े रहना सिखाया जाता है। सियाचिन हो या राजस्थान की भीषण गर्मी, सैनिक किसी प्रतिकूल परिस्थिति में भी पीछे नहीं हटता है। सैनिकों का यही अनुभव उनके चरित्र का निर्माण करते हैं। वास्तव में एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता बल्कि वर्दी का रंग बदलने के बावजूद उसका मनोबल बना रहता है। एक सैनिक हर मोर्चे पर राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए तैयार रहता है।’ दरअसल हर साल 14 जनवरी को सशस्त्र सेना का ‘सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस’ मनाया जाता है। यह दिवस दिवंगत फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, जो 14 जनवरी 1953 को सेवानिवृत्त हुए थे। भारत के सैन्य इतिहास में फील्ड मार्शल करियप्पा, एक महान व्यक्तित्व एवं भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे। जिन्होंने 1947 के युद्ध में सेना को जीत दिलाई थी। साथ ही अनुशासन, सेवा और देशभक्ति की विरासत की नींव भी रखी थी।
