- महाराज समर्थक मंत्रियों के आगे अफसरों की एक नहीं चली
- गौरव चौहान

ग्वालियर में चल रहे व्यापार मेले में आखिरकार 18 दिन बाद वाहनों की खरीदी पर सरकार ने रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट की मंजूरी दे दी। दरअसल, मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया सर्मथकों ने इसके लिए पूरा दमखम लगा दिया। कैबिनेट बैठक में अफसर ग्वालियर व्यापार मेले में वाहनों की खरीदी पर छूट देने के मूड में नहीं थे। इसके लिए उन्होंने कैबिनेट के सामने कई तथ्य रखे। लेकिन महाराज समर्थक मंत्री जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर छूट की मांग पर अड़े रहे। उनके रूख को देखते हुए आखिरकार सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
दरअसल, मप्र में अब मेलों को लेकर भी राजनीति होने लगी है। दरअसल मेलों में राजनीति का विषय अब रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट है, जिसको लेकर प्रतिस्पर्धा का माहौल हो गया है। ऐतिहासिक ग्वालियर व्यापार मेला वाहनों की बिक्री पर रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट के लिए भी जाना जाता है। यहां रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट हर साल मिलती है। लेकिन इस बार ग्वालियर व्यापार मेला का शुभारंभ के 18 दिन तक छूट देने का आदेश नहीं आया। इसे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख से जोडकऱ देखा जाने लगा। आमजन और व्यापारियों में यह बात होने लगी कि सिंधिया को कमजोर करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इसको लेकर सिंधिया सर्मथक मंत्री और नेता सक्रिय हो गए।
भेदभाव के आरोप लगने लगे
गौरतलब है कि सरकार ग्वालियर-उज्जैन के लिए टैक्स छूट का आदेश एक साथ ही जारी करती है। लेकिन 25 दिसंबर को शुभारंभ हुए ग्वालियर मेले में 12 जनवरी तक रोड टैक्स में छूट के अते-पते नहीं थे। जबकि ऑटो सेक्टर सज चुका था, डीलर्स स्टाक मंगा चुके थे, लोग बुकिंग करके डिलीवरी के इंतजार में बैठे थे। ऐसे में आरोप लगने लगे थे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का क्षेत्र होने के कारण सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। आरोप तो यहां तक लगने लगे थे की उज्जैन मेले को चमकाने के लिए ग्वालियर मेले की साख को कमजोर की जा रही है। इसलिए टैक्स छूट में देरी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर और उज्जैन मेला की छूट एक साथ ही जारी होती है, तो ऐसे में ग्वालियर मेला तो लेट हो गया, लेकिन उज्जैन की सही समय पर आएगी। उज्जैन में पूरे मप्र के डीलर वाहन बेचेंगे, ग्वालियर में नहीं।
नहीं चला अफसरों का तर्क
आखिरकार 13 जनवरी को कैबिनेट बैठक में ग्वालियर व्यापार मेले 2026 में वाहनों पर लगने वाले टैक्ट में 50 प्रतिशत की छूट का मामला उठा। चर्चा हुई तो वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि जीएसटी पहले ही घट चुका है। इसी से 10 लाख रुपए तक के वाहन पर एक लाख रुपए तक का लाभ हो गया है, फिर छूट क्यों देनी चाहिए। इस पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे से जुड़े जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर छूट के लिए अड़ गए। तोमर ने कहा कि ऐसे तो गाड़ी ही नहीं बिकेगी। फिर नुकसान कैसा। तुलसी और गोविंद ने कहा, काफी समय से यह परंपरा रही है। इसे रोकना नहीं चाहिए। इस बार भी टैक्स छूट दी जाती है तो लोगों को फायदा होगा। बहस बढ़ी तो रस्तोगी ने कहा, जब जीएसटी ही केंद्र सरकार ने कम कर दिया तो अलग से राज्य कर में छूट देना सही नहीं होगा। इससे राजस्व कलेक्शन में कमी होती है। इस पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी मंत्रियों के सामने हिसाब-किताब रख दिया। उन्होंने कहा कि ग्वालियर व्यापार मेले और उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला 2026 में इतनी गाडिय़ां बिक जाती है कि सरकार को 250 से 300 करोड़ का नुकसान होगा। कैबिनेट में यह भी कहा गया कि ग्वालियर और उज्जैन में तो टैक्स छूट लेने के लिए कार विक्रेता एजेंसियां सिर्फ दिखावा करती हैं। गाडिय़ां भोपाल, जबलपुर या इंदौर में ही खरीदी-बेची जाती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेले से ही गाडिय़ां खरीदी-बेची जाएं, इसका ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने लंबी चर्चा के बाद उज्जैन और ग्वालियर मेले में वाहन टैक्स पर छूट देने की मंजूरी दे दी।
मेलों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल
ग्वालियर व्यापार मेले में हर साल रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जाती थी। जिस कारण से यहां बड़ी संख्या में गाडिय़ों की बिक्री होती थी। मप्र के अलावा बाहर से भी लोग गाडिय़ां खरीदने के लिए यहां आते थे। लेकिन अब मप्र में मेलों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल हो गया है। ग्वालियर व्यापार मेले के अलावा अब उज्जैन व्यापार मेले में भी गाडिय़ों की खरीदी में 50 फीसदी रोड टैक्स की छूट दी जाती है। ग्वालियर के मेला में छूट में देरी को लेकर कहा जा रहा था कि उज्जैन को पहले से अनुमति मिलने से उज्जैन में वाहन बिक्री का ग्राफ ऊपर बढ़ जाएगा। इससे यहां का कारोबार वहां शिफ्ट हो सकता है। उज्जैन मेले में प्रदेश भर के डीलरों को वाहन बेचने का मौका दिया जाता है जबकि ग्वालियर में ऐसा नहीं है, यहां केवल ग्वालियर संभाग के डीलर ही गाडिय़ां बेचते हैं।
